काफी मुश्किल है बिहार में प्रथम चरण का चुनाव कराना, मतदान के प्रतिशत में आ सकती है कमी

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निर्वाचन आयोग द्वारा लोकतंत्र के महापर्व के तिथि की घोषणा कर दी गई है।लेकिन घोषित तिथि के अनुसार प्रथम चरण यानि कि 11 अप्रैल को बिहार के गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई के साथ साथ यूपी के आठ सीटों पर मतदान होने है।लेकिन इस महापर्व के साथ साथ लोक आस्था के महापर्व चैती छठ की तिथि भी टकरा गई है जो काफी परेशानी का सबब बन सकता है और मतदान का प्रतिशत प्रभावित हो सकता है।चैती छठ की शुरुआत 9 अप्रैल से नहाय खाय के साथ हो रही है और सांध्यकालीन अर्घ्य यानी कि पहला अर्घ्य भी 11 अप्रैल को ही है ऐसे में जहां श्रद्धालु लोक आस्था के इस महापर्व को पूरी निष्ठा और आस्था के साथ मनाते है वैसे में लोकतंत्र के इस महापर्व पर असर पड़ने की संभावना प्रबल हो गई है।जिले में इस पर्व को काफी धूमधाम से मनाया जाता है और भगवान भाष्कर की नगरी देव में चार दिवसीय मेला भी लगता है ऐसी स्थिति में चुनाव कराना जिला प्रशासन के लिए चुनौतियों से भरा है।अधिसूचना जारी होते ही पूरे जिले में धारा 144 लागू है ऐसी स्थिति में पर्व को लेकर शहर या गांव में उमड़ने वाली अप्रत्याशित भीड़ को प्रशासन कैसे मैनेज करेगा यह एक यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है।इस संबंध में जिलाधिकारी राहुल रंजन ने बताया कि पूर्व की बैठक में चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दी गई थी लेकिन उसके बाद तिथि की घोषणा हो गई।इस मामले में एक बार फिर बिहार के चुनाव आयुक्त से टेलीफोनिक बात कर विषय वस्तु को रखा जाएगा।यदि बात करने के बाद प्रस्ताव भेजने को कहा जायेगा तो फिर उसे भेजकर चुनाव की तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया जाएगा।लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव आयोग के इस निर्णय से बिहार और यूपी में मतदान के पूर्व स्वीप के माध्यम से मतदान प्रतिशत बढाने के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है वह दम तोड़ देगा।

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