औरंगाबादबिहार

एक दिवसीय मगही लोक उत्सव का हुआ आयोजन

मगध की सांस्कृतिक विरासत ने दुनिया में बनाई पहचान

औरंगाबाद: संस्कार भारती मगही समूह तथा विश्व मगही परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय मगही लोक कला उत्सव का आयोजन नगर में स्थित समाहरणालय के बगल में पटेल सभागार में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत संस्कार भारती, दक्षिण बिहार प्रांत के उपाध्यक्ष तथा विश्व मगही परिषद, नई दिल्ली के अध्यक्ष, मगही विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. भरत सिंह, सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धेश्वर सिंह,भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रामाधार सिंह, शहर के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, संस्था के संरक्षक डॉ. श्रीधर सिंह तथा राजीव प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

गोविंद, हर्षित के द्वारा ध्येय गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए मगही लोक गीत चैता की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए शहर के जाने माने कवि विनय मामूलीबुद्धि ने देखू गौर से समझूं बात, लोक लाज प्रतिष्ठा औ जज्बात, हमर काम मे नेकनीयत इमानदारी न हल , न हे , औव न होयेत, धनंजय जयपुरी ने अइसन लगइत हे घरवा अपन जेल हो गेलई, कोरोनवा में सब प्लान फेल हो गेलई, सानू ने हमर गांवो के नेता जी, डॉ. हेरम्ब कुमार मिश्र ने हम ही मगहिया मगहिए में गाएब की शानदार प्रस्तुति के साथ अन्य कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से माहौल को सराबोर कर दिया। मंच पर उपस्थित डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने मगही और मगध की संस्कृति पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मगध साम्राज्य और मगध की सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर में अपनी पहचान रखती है।

बदलते समय में हम अपनी माटी से अलग होते जा रहे हैं और अपनी संस्कृति को छोड़ते जा रहे है इसे सहेजने की निरंतर कोशिश करनी चाहिए। वहीं प्रो. सिद्धेश्वर सिंह ने कहा कि मगध ज्ञान तथा मोक्ष की भूमि है, गले लगाकर अपनाना हमारी संस्कृति और परंपरा में समाहित है। चर्चा के दौरान ए. एन. मेमोरियल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विनोद सिंह ने कहा कि मगही बोली, मगही भाषा पर गर्व करने की जरूरत है शर्म करने की नहीं। महाराणा प्रताप सेवा समिति के सचिव अनिल सिंह ने रामचरित मानस के हनुमान और सीता संवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि दूर देश में जब भी अपनी लोक संस्कृति क्षेत्र के लोग अपनी लोक बोली में संवाद करते हैं तो उसमें ज्यादा अपनत्व का अनुभव होता है। संस्कार भारती औरंगाबाद के संरक्षक डॉ श्रीधर सिंह ने कहा कि आज हम पाश्चात्य परंपरा में लीन होते जा रहे हैं और अपनी जमीन से खिसकते जा रहे हैं। भोजन, कपड़ा बोली सभी में पाश्चात्य संस्कृति का वास हो गया है जिसे हम अपनी संस्कृति में ढलने और चलने का आग्रह किया। राजीव प्रताप सिंह ने कहा कि मगही संस्कृति के उत्थान के लिए राष्ट्रीय फलक पर इसकी पहचान कायम रखने के लिए संस्कार भारती के माध्यम से निरंतर प्रयास किया जाएगा। साहित्यिक चर्चा के बीच–बीच में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होती रहीं जिनमें विक्रम कुमार ने मनमोहक बांसुरी वादन की प्रस्तुति दी तथा मृत्युंजय ने लोक गीत प्रस्तुत कर माहौल को सुरमई बनाए रखा। संस्कार भारती मगही समूह संयोजक विकास मिश्र ने बताया कि मगही हमारी मातृ बोली, मातृ भाषा है। जब भी मगही में कोई बात करता है तो ऐसा लगता है जैसे कोई सगा बहुत दिन बाद गले से लगाया हो। मैं संस्कार भारती का ऋणी हूं जिसने मुझे मां की सेवा करने का मौका दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कार भारती, दक्षिण बिहार प्रांत के उपाध्यक्ष, विश्व मगही परिषद, नई दिल्ली के अध्यक्ष, मगही विभाग, मगध विश्वविद्यालय बोधगया के विभागाध्यक्ष प्रो. भरत सिंह ने मगध का प्राचीन भौगोलिक तथा सांस्कृतिक इतिहास को विस्तार से बताया। वर्तमान समय में मगध की संस्कृति पर चिंता जताते हुए कहा कि जिसका इतिहास इतना गौरवशाली रहा हो उसकी ऐसी हालत देखने से बड़ी दुख की अनुभूति होती है। औरंगाबाद जिले के देव स्थित राजा का वर्णन करते हुए कहा कि वो सिर्फ राजा ही नही अपितु एक साहित्यकार, एक कलाकार तथा एक बेहतरीन नागरिक भी थे जिनके द्वारा मगही संस्कृति को लेकर किया गया कार्य इतिहास तथा वर्तमान को गौरवान्वित करता है। कार्यक्रम का संचालन जिले के सुख्यात उद्घोषक कवि सह शिक्षक, डॉ हेरम्ब कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पूरे कार्यक्रम का संचालन मगही में किया गया।साथ ही अधिकतम अतिथियों ने अपने विचार भी मगही में ही प्रस्तुत किए।वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई। कार्यक्रम में प्रांतीय मंत्री रंजय अग्रहरी, औरंगाबाद इकाई के अध्यक्ष पंकज पटेल, सचिव चंदन गोकुल, सहसचिव मृत्युंजय कुमार, गायन प्रमुख गोविंद, अमन राज, हर्षित, अमन पंडित, भोला, डॉ मनोज मिश्र, डॉ राजाराम पाल, प्रेरणा सिन्हा, संजय मिश्र, हरि पाठक आदि अनेक लोगों की महती उपस्थिति रही।

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