औरंगाबाद

नही रहे शिव शिष्यता के जनक स्वामी हरिद्रानंद,शिव शिष्यों में दौड़ी शोक की लहर

औरंगाबाद। देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी प्रखर आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रसिद्ध एवं शिव शिष्य के जनक स्वामी हरिद्रानन्द अब हमारे बीच नहीं रहे।उन्होंने रविवार की सुबह 3 बजे रांची के पारस हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली और नश्वर शरीर का त्याग कर परमात्मा में विलीन हो गए। बताया जाता है कि शनिवार की शाम उन्हे सांस लेने में शिकायत हुई।जिसके बाद पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया।लेकिन चिकित्सकों को तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नही जा सका।

 

स्वामी जी के निधन के बाद पूरे देश एवं उनके गुरुत्व में संसार में ईश्वरीय चेतना जगाने वाले शिष्यों में शोक की लहर दौड़ गई और उनके अंतिम दर्शन को लेकर देश विदेश के शिष्यों का उनके रांची के धुर्वा स्थित A17 सेक्टर 2 आवास पर उनके अंतिम दर्शन को लेकर भीड़ उमड़ पड़ी।

 

स्वामी जी के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर उनके ज्येष्ठ पुत्र अर्चित आनंद ने इस दुखद समाचार से शिव शिष्यों को अवगत कराया।फेसबुक पेज में बताया गया है कि उनका पार्थिव शरीर रांची के धुर्वा स्थित क्वार्टर नंबर 17 सेक्टर 2 एचईसी, पुरानी विधानसभा के पीछे गेट नंबर 1 पर रविवार 4 सितंबर की सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक तथा पुनः सोमवार 5 सितंबर की सुबह 6 बजे से सुबह 11 बजे तक रखा जाएगा।

 

स्वामी हरिद्रानंद के गोलोक गमन पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए लोकराज के लोकनायक पुस्तक के लेखक राकेश कुमार ने कहा कि अतिमानव की केवल काया बदल जाती है। नश्वर शरीर हमारे बीच नहीं होता किंतु आत्माएँ तो अमर होती हैं।वैसे, Harindrananda साहेब/अंकल ने इहलोक/ सांसारिक लोक में भी अमरता प्राप्त किया है और परलोक में तो महादेव अमरत्व देने को बेताब थे ही क्योंकि ईश्वरीय लोक में इनकी आवश्यकता आन पड़ी थी महादेव को।स्वामी जी ने ‘शिव ही गुरु है’ सारगर्भित शब्द देकर अपने शिष्यों के हृदय परम सत्य को स्थापित किया।

 

उन्होंने कहा कि मन बहुत ही विह्वल है। शिव शिष्यता का अलख जगाने वाले हरीन्द्रानंद साहेब/अंकल अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदायी। हम सभी गुरुभाइयों पर अब महादेव के लोक से ही कृपा बरसाते रहेंगे साहेब।

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