औरंगाबाद

सिन्हा कॉलेज में प्राचार्य व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद से विद्यार्थियों का भविष्य हो बर्बाद, प्राचार्य ने कहा नो कोर्स नो पेमेंट, अच्छे काम करने से गलत लोगो को होती है परेशानी

प्रचार्या ने कही पूरे विश्वविद्यालय का है मामला, यहाँ सोची समझी साजिश के तहत दिया जा रहा धरना

औरंगाबाद, कपिल कुमार

औरंगाबाद शहर के सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय में प्राचार्य व व्यवसायिक शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद व पिछले 4 दिनों से दिए जा रहे धरना प्रदर्शन को लेकर रविवार को प्राचार्य डॉ रेखा सिंह ने एक सोची समझी साजिश के तहत राजनीतिक तूल देने की बात कही है। प्रेस वार्ता के दौरान प्राचार्य ने कहा कि व्यवसायिक पाठ्यक्रम के कुछ कोर्स बंद होने के कारण ऐसी समस्या उत्पन्न हुई है। प्राचार्य ने बताया कि महाविद्यालय में संचालित सभी व्यवसायिक और शिव जी का 2022 23 के नामांकन पर सरकार के द्वारा सीट निर्धारित पर रोक लगा दी गई है जिससे संबंधित पत्र दिनांक 1-4-2022, 25-5- 2022 एवं 9- -7 2022 के द्वारा उक्त बात की सूचना सभी महाविद्यालय एवं विभागाध्यक्ष को भी दी गई है। प्रचार्या ने बताई की B.lis एक ऐसी कोर्स है, जो मात्र 1 वर्ष का होता है। और इस व्यवसायिक विषय की पढ़ाई बहुत ही कम महाविद्यालय में होती है। सत्र 22-23 में सरकार द्वारा नामांकन पर रोक लगा दी गई है। ज्ञातव्य हो कि ब्लीज स्ववित्तपोषित कोर्स है। जिसके कारण जब इस सत्र में छात्र नामांकित नहीं होंगे तो फिर शिक्षक किसको पढ़ाएंगे और शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का क्या काम रह जाएगा। अगर की शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारियों से काम लिया जाए तो फिर वह वेतन की मांग करेंगे। ऐसी परिस्थिति में वेतन भुगतान करने पर वित्तीय अनियमितता का मामला बनेगा। उन्होंने बताया कि पत्रांक Fin/ak/428/22 दिनाँक 9/7/22 के द्वारा सभी व्यवसायिक/स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों का खाता केंद्रीयकृत होने की बात कही गई है और व्यवसायिक एवं स्ववित्तपोषित कोर्सों का चेक भी विश्वविद्यालय द्वारा मांग लिया गया है। जहां तक अन्य व्यवसायिक एवं स्ववितपोषित कोर्स में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों को हटाने की बात कही जा रही है वह बिल्कुल निराधार है। महाविद्यालय में सभी विभागों को सुव्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण सुधारने की पहल जब हमने किया तो सभी महाविद्यालय के कुछ शिक्षक,शिक्षकेतर कर्मचारी विरोध में खड़े हो गए। यह लोग कहीं ना कहीं दिग्भ्रमित होकर सोची समझी साजिश के तहत धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे राजनीतिक रूप देने का कार्य कर रहे हैं। प्राचार्य ने बताया कि हम सभी उन लोग से बार-बार आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की ओर आएं और धरना प्रदर्शन को समाप्त करें लेकिन वह लोग हाथापाई व आप सब बातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिक्षकेतर कर्मचारियों की शिकायत पर जब यह सवाल पूछा गया कि जब किसी बात को लेकर प्राचार्य से शिक्षकेतर कर्मचारी मिलने जाते हैं तो उनसे मिलने के बजाय टालमटोल किया जाता है। तो उन्होंने बताया कि ऐसी कोई बात नहीं है किसी काम में व्यस्त रहने के कारण कुछ देर बाद मिलने को बोला जाता है। स्वीपर में कार्यरत चांदमूनी कुंवर के बारे में जब पूछा गया कि उनके पति पिछले 15 सालों से कार्यरत हैं। कुछ साल पहले निधन होने के बाद चांदमुनि कुंवर कॉलेज में कार्य कर रही है। उन्हें भी हटाया जा रहा है, तो इस पर प्राचार्य ने बताया कि उनका कोई कागजात नहीं है। लोगों का बहाली विश्वविद्यालय द्वारा होता है। प्रिंसिपल के द्वारा नहीं। धरना प्रदर्शन समाप्त कर विद्यार्थियों की भविष्य पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि हम लोग खुद से कई बार उन लोग से बातचीत करने का प्रयास किया। उनके समस्याओं का हल करने का भी प्रयास किया, लेकिन उन लोग मानने को तैयार नहीं है। धरना प्रदर्शन से बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। इसका जिम्मेवार खुद शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी हैं, जो धरना प्रदर्शन में शामिल हैं। उन्होंने हर संभव समझौते की बात कही कि जिस तरह से समझौता पर मान जाएं हम तैयार हैं। इस मौके पर प्राचार्य डॉ रेखा सिंह के अलावे शक्ति सिंह, संतोष कुमार सुमन, संजीव सिंह समेत कई अन्य शामिल थे।

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