औरंगाबाद

परिवार नियोजन पखवाड़ा में स्वास्थ्य संस्थानों को मिला लक्ष्य,परिवार नियोजन के लिए बास्केट ऑफ च्वाइस की मदद लें दंपति

11 तक दंपति संपर्क तथा 24 तक परिवार नियोजन सेवा सप्ताह,प्रजनन स्वास्थ्य पर होता है अच्छा असर, महिलाएं रहती हैं स्वस्थ

 

औरंगाबाद। जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग दवारा परिवार नियोजन पखवाड़ा का आयोजन किया गया है. यह पखवाड़ा दो चरण में होना है. पहला चरण पांच सितंबर से 11 सितंबर तक दंपति संपर्क तथा दूसरे चरण में 12 सितंबर से 24 सितंबर तक परिवार नियोजन सेवा सप्ताह होगा. सिविल सर्जन डाॅ कुमार वीरेंद्र ने परिवार नियोजन पखवाड़ा को लेकर उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक सहित सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये हैं.

 

सभी स्वास्थ्य संस्थानों को लक्ष्य भी दिया गया है. सदर अस्पताल तथा अनुमंडलीय अस्पताल दाउदनगर को प्रति संस्थान 80 महिला बंध्याकरण तथा 15 पुरुष नसबंदी कराने का लक्ष्य दिया गया है. वहीं ये इन दोनों स्वास्थ्य केंद्रों के लिए प्रति संस्थान 200 महिलाओं को कॉपर-टी और 200 महिलाओं को अंतरा इंजेक्शन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

सीएचसी तथा पीएचसी को दिये गये लक्ष्य

जिला के बारुण, देव, रफीगंज, ओबरा, मदनपुर, हसपुरा स्थित प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 70 महिलाओं के बंध्याकरण का लक्ष्य दिया गया है. कुटुंबा, नबीनगर, गोह, जम्होर स्थित प्रत्येक सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 75 महिलाओं के बंध्याकरण का लक्ष्य दिया गया है. प्रत्येक सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दस पुरुषों के नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है.

 

इसी प्रकार प्रति पीएचसी 50, एपीएचसी को 25 तथा उप स्वास्थ्य केंद्र को 5 अंतरा इंजेक्शन लगाने का लक्ष्य दिया गया है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 10 कॉपर टी तथा 30 अंतरा इंजेक्शन लगाने का लक्ष्य दिया गया है. वहीं कॉपर टी को लेकर प्रति पीएचसी 50, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 15 एवं स्वास्थ्य उपकेंद्र पांच कॉपर टी लगाने का लक्ष्य दिया गया है.

परिवार नियोजन के लिए है बास्केट ऑफ च्वाइस

स्वास्थ विभाग के फैमिली प्लानिंग काॅर्डिनेट देव मूरत कुमार ने बताया परिवार नियोजन का सकारात्मक असर प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ता है. परिवार नियोजन का सीधा असर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को रोकने में होता है. परिवार नियोजन गर्भपात की संख्या को भी कम करने में मददगार है. परिवार नियोजन के लिए महिलाओं और पुरुषों दोनों के पास विभिन्न तरह के विकल्प मौजूद हैं. उन्होंने बताया परिवार नियोजन के लिए इच्छुक दंपतियों के पास बास्केट ऑफ च्वाइस का विकल्प हैं. बास्केट ऑफ च्वाइस में विभिन्न गर्भनिरोधक साधन होते हैं.

 

इनमें स्थायी तथा अस्थायी साधन होते हैं. एक दंपति अपनी सुविधानुसार गर्भनिरोध के विकल्प चुन सकता है. बास्केट ऑफ च्वाइस में गर्भनिरोधक गोलियां व इंजेक्शन, कॉपर टी, कंडोम आदि मौजूद होते हैं. उन्होंने बताया परिवार नियोजन के लिए आवश्यक है कि शादी के बाद पहला बच्चा दो साल पर और दूसरी संतान पहले बच्चे के जन्म के तीन साल के अंतराल पर होने चाहिए.

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