औरंगाबाद

राजधानी एक्सप्रेस हादसे को याद कर रफीगंज में धावा नदी के पुल के समीप रेल कर्मियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की पटरी की पूजा

2 मिनट का मौन रखकर हादसे में मृत हुए लोगों को दी विनम्र श्रद्धांजलि

औरंगाबाद। देश में रेल हादसों की कमी नहीं रही है और इन हादसों में कई लोगों ने अपनी जानें भी गंवाई हैं।लेकिन औरंगाबाद के रफीगंज के धावा पुल पर हुए राजधानी एक्सप्रेस के हादसे को यहां के लोग आज तक नहीं भूले हैं। रेल हादसे के इतिहास को अगर पलट कर देखें तो पाएंगे कि औरंगाबाद ही एक ऐसा जिला है जहां के लोग अपरिचित लोगों के मौत को याद कर उसकी बरसी पिछले 20 वर्षों से मना रहे और उक्त तिथि को हादसे के समय से पूर्व घटना स्थल पर पहुंचकर न सिर्फ पटरी की पूजा करते है बल्कि दो मिनट का मौन रखकर मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते है।इतना ही नहीं इस दौरान रेलकर्मियों के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ता अपने हाथों में कैंडल लेकर विश्व के किसी भी देश में ऐसे हादसे ना हो उसकी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

 

औरंगाबाद के रफीगंज के लोग आज भी वर्ष 2002 के 9 सितंबर की रात 10 बजकर 40 मिनट पर हुए राजधानी एक्सप्रेस के हादसे को न सिर्फ याद कर सिहर जाते है बल्कि मर्माहत हो जाते है और उनके आंखों के आगे चलचित्र की भांति वह दृश्य गुजरने लगते है कि कैसे राजधानी एक्सप्रेस के 13 बोगी ताश के पत्तों की भांति भरभरा धावा नदी में गिर पड़े थे और 135 लोगो की जिंदगी असमय काल के गाल में समा गई थी। इस घटना की जांच भी हुए लेकिन जांच की प्रक्रिया राजनीतिक भेंट चढ़ गई और इस हादसे के केंद्र और राज्य सरकार ने दो अलग अलग कारण बताएं। खैर इन सभी राजनीति से दूर रफीगंज के लोग शुक्रवार की रात हादसे की बरसी मनाई और पटरी की पूजा की।

 

सेक्शन इंजिनियर आर डी चौधरी एवं पी डब्लू आई  रेलकर्मियों एवं समाजसेवियों द्वारा 20 वीं बरसी मनाई गई।रेल कर्मियों ने पूरे विधि विधान से कैंडल जलाकर पटरी की पूजा की और नारियल फोड़कर प्रसाद चढ़ाया तथा मृत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। पीडब्ल्यू आई रामभजन सिंह के नेतृत्व में धावा नदी के पूल के समीप पटरी की पूजा की गई और नारियल फोड़कर मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।इस दौरान दो मिनट का मौन रखकर मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

इस मौके पर अवधेश कुमार, रात्रि प्रहरी चंदन कुमार,राकेश, दिनेश कुमार, अनिल कुमार ,राजबल्लभ कुमार, प्रसाद यादव, बालमुकुंद कुमार, संजय पासवान, अभिमन्यु कुमार, नंदू , कृष्ण मुरारी, दीपेंद्र कुमार, प्रेमचंद लकड़ा रामदास मांझी, धर्मेंद्र कुमार, समाजसेवी डॉक्टर तुलसी यादव, समाजसेवी डी के, सुरेश, अजय कुमार, सतीश कुमार मनदीप कुमार, जयंत सिंह राजपूत, डॉ मनोज कुमार, गोविंद कुमार, दिनेश यादव, सुनील मिश्रा, सुनील देव, पप्पू यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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