औरंगाबाद

भारतरत्न विश्वेश्वरैया को अभियंताओं ने किया याद, उनके बताए रास्ते पर चलने का लिया संकल्प

औरंगाबाद। गुरुवार को जिला अभियंता संघ के बैनर तले शहर के डीएम आवास समीप स्थित एक निजी होटल में अभियंता दिवस मनाया गया और आधुनिक भारत के शिल्पकार मोक्षगुण्डम विश्वेसरैया को याद किया गया।अभियंता दिवस का उद्घाटन उप विकास आयुक्त अभ्येंद मोहन सिंह, डीआरडीए निदेशक बालमुकुंद प्रसाद, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता इंजीनियर मोहम्मद शाहिद इकबाल, अधीक्षण अभियंता इंजीनियर सुजीत कुमार, सोन कैनाल के अधीक्षण अभियंता इंजीनियर वीरेंद्र प्रसाद, जिला अभियंता संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य अभियंताओं ने दीप प्रज्वलित कर किया।

 

इस दौरान अभियंत्रण क्षेत्र में बेहतर करने वाले अभियंताओं को सम्मानित किया गया।सम्मानित होने वाले अभियंताओं में इंजीनियर प्रमोद कुमार, इंजीनियर मनोज कुमार, इंजीनियर रंजीत सिंह, इंजीनियर गौतम सिंह, मोहम्मद शाहिद अली शामिल रहे। उद्घाटन के पश्चात आयोजन में शामिल अतिथियों ने स्व विश्वेसरैया को याद किया एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

 

वक्ताओं ने बताया कि जिस वक्त अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का दूर दूर तक नामों निशान नहीं था। उस वक्त विश्वेसरैया ने अपने बुद्धिमता का देश का परिचय दिया और अपनी कार्यकुशलता न सिर्फ लोहा मनवाया। बल्कि भारत में ऐसे ऐसे दुर्लभ आर्टिटेक्ट्री की मिशाल प्रस्तुत की कि आज भी उसका कॉपी करना मुश्किल है। उन्होंने हैदराबाद शहर की डिजाइन तैयार कर उसे बसाया। यही कारण है कि उन्हें फादर ऑफ मैसूर सिटी के नाम से जाना जाता है।

 

वक्ताओं ने बताया कि उनके द्वारा निर्मित पुणे में खड़कवासला जलाशय, ग्वालियर में तिगरा बांध मैसूर में कृष्णा राजा सागर बांध आज भी अद्वितीय अभियंत्रण की निशानी हैं। इसके अलावा उन्होंने विशाखापट्टनम के बंदरगाह की समुद्र कटाव से रक्षा के लिए एक बेहद ही उत्कृष्ट प्रणाली विकसित की। जिसके कारण विशाखापट्टनम का बंदरगाह आज भी सुरक्षित है। स्वर्गीय विश्वेश्वरैया ने मैसूर में कई यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग कॉलेज, कई सड़कें और कई पुल पुलिया का निर्माण कर देश में अभियंत्रण कार्य कुशलता का परचम लहराया।

 

वे पहले ऐसे अभियंता हैं जिन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित किया गया। आज तक उनके बाद कोई ऐसा अभियंता नहीं पैदा हुआ जिन्हें इस सम्मान से भारत सरकार नवाज सके। वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा अमेरिका आदि देशों का भ्रमण किया। लेकिन वे जापान के अभियंत्रण कला से काफी प्रभावित थे और उससे प्रेरणा लेते हुए उन्होंने भारत को विकासशील बनाने का संदेश दिया और देश में विकास के कार्यों की नीव डाली तथा कई योजनाओं का सृजन किया।

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