औरंगाबाद

साहित्य अकादमी पुरष्कार प्राप्त उर्दू के वरीय साहित्यकार अल्हाज सैयद डॉ. हुसैन उल हक के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

औरंगाबाद। साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त उर्दू के वरीय साहित्यकार अल्हाज सैयद डॉक्टर हुसैन उल हक का निधन 23 दिसंबर को हो गया.उनके निधन पर साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गयी और देश भर से साहित्यकारों ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की. सैयद हुसैन उल हक के निधन पर जिले की हिंदी और उर्दू साहित्य के क्षेत्र में अलख जगा रहे लेखकों, कवियों एवं शायरों ने शहर के धरनीधर रोड स्थित उर्दू लाइब्रेरी में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन लाइब्रेरी के सभागार में किया.इस दौरान उनकी कृतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई तथा  साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया गया.

 

सर्वप्रथम वरीय साहित्यकार के निधन को लेकर उपस्थित साहित्य प्रेमियों द्वारा संवेदना व्यक्त की गयी और बताया गया कि उनका जाना साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. वक्ताओं ने यह जानकारी दी कि वर्ष 2020 में उनके उपन्यास ‘अमावस में ख्वाब’ के लिए साहित्य अकादमी के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. शोक सभा की सदारत जिले के वरिष्ठ कलमकार एवं शायर शब्बीर हसन शब्बीर ने किया और मंच संचालन प्रोफ़ेसर कासिम फरीदी द्वारा किया गया.

 

सम्बोधन के क्रम में मदरसा इस्लामिया औरंगाबाद के पूर्व प्रधानाध्यापक मौलाना इजहार उल हक ने कहा कि हमारे बीच के एक साहित्यकार का विश्व स्तर पर ख्यातिलब्ध होना हमारे लिए गर्व का विषय है.

 

मदरसा इस्लामिया के सचिव जहीर अहसन आज़ाद एवं स्वयंसेवी संस्था इस्लामिक बढ़ते कदम के फाउंडर सैयद मो. दायम ने आगामी वर्ष से उनके पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कराने तथा दिवंगत साहित्यकार के नाम से प्रतिवर्ष अवार्ड देने की घोषणा की.

 

 

बज़्म-ए-उर्दू के यूसुफ जमील एवं गुलफाम सिद्दीकी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उर्दू साहित्य के अंतर्गत अल्हाज सैयद डॉक्टर हुसैनउल हक को फिक्शन लेखन का सिद्धहस्त माना जाता था उनके जाने से उर्दू भाषा में एक विधा का काफी घाटा हुआ है.

 

 

जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के नागेंद्र कुमार दुबे ‘केसरी’ ने दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और कहा कि जनाब हुसैनउल हक के निधन से ना सिर्फ औरंगाबाद बल्कि पूरे देश के साहित्य जगत में खामोशी छा गई है.

 

 

कवि एवं पत्रकार प्रियदर्शी किशोर श्रीवास्तव ने अपने संबोधन के क्रम में कहा कि उर्दू के विस्तार हेतु आवश्यक है कि उर्दू सीखने को इच्छुक अन्य भाषा भाषियों को भी इसकी जानकारी देने की विशेष व्यवस्था की जाए और कक्षाएं प्रारम्भ की जाए. जिसकी लीगों ने सराहना की और शीघ्र ही इस व्यवस्था को अमली जामा पहनाने के लिए अपनी सहमति दी.

 

 

उर्दू के मशहूर शायर निजाम कुरैशी द्वारा दिवंगत आत्मा को शांति और जन्नत में स्थान देने के लिए ईश्वर से दुआ की गई. उर्दू साहित्य के लिए युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मानित साहित्यकार साक़िब फरीदी ने हुसैन उल हक के शख्सियत एवं उनकी लिखी पुस्तक अमावस के ख्वाब पर विस्तार से प्रकाश डाला.

 

 

इस श्रद्धांजलि सभा में चरागे अदब के आफताब राणा, इकबाल अख्तर दिल, प्रख्यात दंत चिकित्सक डॉ मो. यूसुफ, मसीहउज़्मा, मौलाना फैज़ान, समाजसेवी मुमताज़ अहमद जुगनू, जहीर अहसन आजाद, हाफिज फैजान, सैयद मोहम्मद दायम, सैयद अहमद रजा कादरी, मौलाना इजराहुल हक, अयाज आलम सिद्दीकी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

इसे भी पढ़ें

Back to top button

You cannot copy content of this page