औरंगाबाद

साप्ताहिक काव्य संध्या में हुई नौ रसों की कविता पाठ

औरंगाबाद। जिला मुख्यालय स्थित सत्येंद्र नगर मुहल्ले में सिन्हा कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह के आवास पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में साप्ताहिक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। काव्य संध्या की अध्यक्षता जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन औरंगाबाद के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में समकालीन जवाबदेही के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा एवं सिंहा कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ रामाधार सिंह उपस्थित रहे।

 

काव्य संध्या का संचालन आधुनिक हिंदी काव्य के उत्प्रेरक कवि अनिल कुमार अनल ने किया।उपस्थित कवियों ने नवरात्र आगमन के पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में मां दुर्गा को याद करते हुए नौ रसों से अभीपूरित काव्य पाठ किया। इस क्रम में हिमांशु चक्रपाणि ने झकझोरने वाली रचना बात अपनी महफिल में सुनाकर जो भाग जाए तो उन्हें बुलाएगा कौन का पाठ किया। धनंजय जयपुरी ने छंद बद्ध श्रृंगारिक कविता का पाठ किया।

 

आधुनिक काव्य के मुक्त हस्त कवि नागेंद्र प्रसाद केसरी ने विचित्र एवं रहस्यमई काव्य पाठ किया। जनार्दन जलज ने ऊर्जास्वित होता रहे प्राण का पाठ करके खूब तालियां बटोरी।शंभूनाथ शुक्ला ने भी मन को उद्वेलित करने वाली कविता का रसपान कराया। डॉ रामाधार सिंह ने आ गया बसंत छा गया बसंत काव्य पाठ करके सबका मन मोह लिया।रोहित कुमार का काव्य पाठ को सबने सराहा।विनय मामूली बुद्धि की रचनाओं ने समसामयिक प्रहार करते हुए कृष्ण के गुरु सांदीपनी डर गए का पाठ किया।

 

सुरेश विद्यार्थी ने भी मां दुर्गा को समर्पित नौ रूपों की व्याख्या की । बलराम मिश्र ने वर्तमान सामाजिक परिवेश में घटने वाली घटनाओं को इंगीत करते हुए समसामयिक कविता का पाठ किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने इस तरह के कार्यक्रम पर प्रसन्नता व्यक्त की। कहा कि साहित्यिक उर्वरता को जीवंत बनाए रखने में कवियों की भूमिका की सराहना की। एवं इस तरह का साहित्यिक आयोजन करने के लिए सहयोग करने का वचन दिया।

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