औरंगाबाद

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के किरणों से निकलता है अमृत की धार

खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की है परंपरा

राजेश मिश्रा

औरंगाबाद। रविवार को हो रहे, शरद पूर्णिमा को लेकर शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के प्रकाश से अमृत की धार बहता है।

 

जो कि खुले आसमान के नीचे घर के गृहिणीओ द्वारा खीर बनाकर रखने की परंपरा चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि रात्रि में रखे गए खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखे गए खीर को प्रसाद रूपी खाने से रोग व्याधि से मुक्ति मिलती है।

 

शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है एंव वह अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है। इस रात्रि में चन्द्रमा का ओज सबसे तेजवान और ऊर्जावान होता है।बताते चलें कुछ रातों का महत्व अधिक होता है जिसमें शरद पूर्णिमा भी शामिल है।

 

इसी दिन से पुण्य प्रदाता द्वारा कार्तिक मास के आरंभ होते ही व्रत ,स्न्नान और दीपदान का आरम्भ शुरू कर दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक नित्य प्रति संध्या के समय तुलसी और खुले आकाश के नीचे दीपदान करने से दुःख,दरिद्र का नाश होता हैं।

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