औरंगाबाद

नहीं रहे सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षक परमानंद पाठक, लोगो ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

उनके द्वारा कहे गए एक एक शब्द छात्र छात्राओं के लिए प्रेरणादायक

राजेश मिश्रा

औरंगाबाद। जिले में मंगलवार को शहर के यमुनानगर निवासी सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षक परमानंद पाठक का निधन हो गया। वें लगभग 70 वर्ष के थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। जिन्हें जमुहार मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन स्थिति में कुछ सुधार ना होता देख परिजन सदर अस्पताल औरंगाबाद लेकर आए जहां कि उन्होंने अंतिम सांस ली।

 

अथक प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया न जा सक। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ कर चले गए। कुछ महीने पूर्व ही एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया था कि शिक्षा वह अस्त्र है जो कि कोई छीन नहीं सकता, यह सदैव आपके पास रहता है।मन के हारे हार है मन के जीते जीत, का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा था कि जीवन में सफल होने के लिए निरंतर दृढ़ इच्छाशक्ति एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े।

 

इससे आप बुलंदियों की नई ऊंचाइयों को जरूर छुएंगे। जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। लेकिन जो हर तरह के विकट परिस्थितियों से जूझना जानता हो वही आधुनिक युग में सफल होता है। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिभा के धनी व्यक्ति परमानंद पाठक बहुत ही शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। वे बहुत ही कम बोलते थे। लेकिन उनके द्वारा कहे गए एक एक शब्द से ज्ञान की गंगा बहती थी।

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