औरंगाबाद

एक पीड़ित महिला की पुकार, सुनो सरकार

औरंगाबाद। बिहार में वर्ष 2016 से शराबबंदी है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी जैसे कठोर कदम महिलाओं के अनुरोध पर उठाया। ताकि इससे घर के पुरुष अपनी कमाई शराब में बर्बाद ना करें और घर की खुशहाली में उस पैसे को लगाए तथा शराब पीने के बाद महिलाएं अपने पतियों के वहशीपन का शिकार न हो सके।

 

मुख्यमंत्री के द्वारा किए गए शराब बंदी के बाद बिहार में एक दो वर्ष तक सख्ती तो दिखी।लेकिन शराब कारोबारियों ने होम डिलेवरी कर शराबियों की चिंता दूर कर दी।क्योंकि उन्हें बैठे बिठाए बिना मेहनत किए शराब उपलब्ध होने लगे।इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद महिलाओं पर प्रताड़ना का दौर चालू हो गया।

 

कुछ जो साहसी थी उन्होंने थाने का शरण लिया और अपने अपने पतियों को जेल भिजवाया। तो कुछ ने उनके आदत में सुधार लाया।लेकिन जिन्होंने हिम्मत नही जुटाया वह आज भी शराब पीकर आए पतियों की प्रताड़ना का शिकार हो रही है।

 

ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को औरंगाबाद में देखने को मिला जब पौथू से चलकर एक महिला सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र पहुंची और वहां मौजूद मीडिया कर्मियों को अपनी परेशानी बताई। महिला चाहती थी कि किसी तरह से उसके पति को लेकर लोग नशा मुक्ति केंद्र भर्ती कराए ताकि उसकी आदत में सुधार हो सके और वह शराब छोड़ दे। लेकिन यहां ऐसी व्यवस्था नहीं होने पर उसके हिम्मत ने जवाब दे दिया और वह रोने लगी।

 

महिला ने बताया कि उसका नाम देवंती देवी है और उसके पति भानु प्रताप विश्वकर्मा पौथू में ही चापाकल एवं बोरिंग का काम करते हैं और जो भी कमाते हैं उसे शराब में उड़ा देते हैं। किसी तरह से कुछ पैसे छीन कर वह अपने और अपने बच्चों का पेट भरती है। लेकिन पति पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वह बराबर शराब पीकर उसकी पिटाई करता है।

 

महिला ने बताया कि बात बात में पति उसे प्रताड़ित करता है। स्थिति यह है कि उस घर में जीना दूभर हो गया है। वह चाहती है कि किसी तरह से जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन उसके पति को पकड़ कर ले जाए और उसके आदत को सुधारे।

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