औरंगाबाद

सत्येंद्र नगर के श्रेयस ने रचा इतिहास,की दो क्षुद्र ग्रहों की खोज,अपने नाम पर किया दोनो क्षुद्र ग्रहों के नाम

नासा तीन वर्षों तक करेगी दोनों क्षुद्र ग्रहों की मॉनिटरिंग

औरंगाबाद। शहर के सत्येंद्र नगर निवासी शिक्षक सूर्यकांत सिन्हा एवं शिक्षिका निभा सिन्हा के पुत्र श्रेयस बी चंद्रा ने अपनी विलक्षण प्रतिभा से इतिहास रच दिया है। उसने सौरमंडल के दो क्षुद्र ग्रहों को ढूंढ निकाला। श्रेयस की इस खोज को लेकर नासा की टीम ने उससे संपर्क किया और अब दोनों क्षुद्र ग्रह उसके नाम SBC 2331 और SBC 3117 से जाने जाएंगे। श्रेयस की इस उपलब्धि से उसके शिक्षक माता-पिता न सिर्फ खुश हैं बल्कि उसके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

 

अपनी उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए श्रेयस ने बताया कि इस कार्य के लिए उसकी टीम है और उस टीम में हर्ष आलोक तथा ओजस लुटरेजा शामिल हैं। उसने बताया कि टीम के सदस्यों के द्वारा कुल सात क्षुद्र ग्रहों की खोज की गई है। श्रेयस ने बताया कि नासा ऐसे कार्यक्रम का आयोजन करती है जिससे अंतरिक्ष के बारे में रुचि रखने वालों को शामिल किया जाता है। इसमें रजिस्ट्रेशन के बाद कुछ परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है और उसके बाद नासा के द्वारा 4 इमेज दिए जाते हैं।

 

नासा से प्राप्त उन इमेज को 24 घंटे के अंदर में इनेलाईज करना पड़ता है। जिसके लिए नासा ही स्पेशल टाइप का एक एप्लीकेशन देती है।यह एप्लीकेशन एस्ट्रोनॉमिका के नाम से जाना जाता है। जिसको सबमिट करने के लिए सब्सक्रिप्शन नासा के द्वारा ही प्राप्त होता है।श्रेयस ने बताया कि उसका उपयोग करके क्षुद्र ग्रह नासा के वेबसाइट पर अपलोड करना पड़ता है। अपनी उपलब्धि को लेकर श्रेयस ने अपने टीम के सदस्यों को काफी धन्यवाद दिया है।उसने विशेषकर ओजस लुटरेजा को दिया है।जिसने काफी शीघ्रता से चार क्षुद्र ग्रह को खोजा है।

 

श्रेयस ने बताया कि नासा उनके द्वारा खोजे गए सुदूर ग्रहों को 3 साल तक लगातार ट्रैक करेगी उसके बाद यदि वे क्षुद्रग्रह अस्तित्व में रहते हैं तो वहां से एक सर्टिफिकेट मिलेगा और तब नासा जाने की उम्मीद बढ़ जाएगी। श्रेयस फिलहाल दिल्ली में रहकर इंजीनियरिंग की तैयारी में जुटा हुआ है और अंतरिक्ष से जुड़े गतिविधि पर लगातार नजर रख रहा है।श्रेयस की इच्छा आगे चलकर एक बड़े साइंटिस्ट बनने का है।

 

गौरतलब है कि श्रेयस ने इस उपलब्धि से पूर्व भी अपने एक आविष्कार को लेकर काफी चर्चित हुआ था।श्रेयस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी वूमेन डिवाइस भी बनाया है जो अनुसंधान की प्रक्रिया में है। उस डिवाइस के तहत कोई भी किशोरी, युवती या महिला अपने मोबाइल में इंस्टाल करके रख सकती है।

 

उन्हे अकेले में सड़क पर या को अन्य जगह पर किसी तरह के खतरे का आभास होगा तो वह मोबाइल के एक बटन को दबाएंगी जिससे 4 फीट तक रहे बदमाशों को करंट का झटका लगेगा और वह थोड़ी देर तक अचेत हो जाएगा। तब तक महिलाएं, युवती या किशोरी खुद को सुरक्षित कर वहां से निकल जाएगी।श्रेयस की टीम में शामिल ओजस ने भी अपनी उपलब्धियों को साझा कर इसे बेहद ही रोमांचकारी बताया है।

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