औरंगाबाद

राज्य और देश के विकास में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता-त्रिवेणी पाण्डेय

औरंगाबाद। आधुनिक बिहार के निर्माता, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, आजादी से पूर्व बने अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू) को उनकी 135वीं जयंती पर शुक्रवार को पेंशनर भवन ओबरा में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर तैल्य चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर वरिष्ठजनों ने श्रीबाबू को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पेंशनर समाज के सचिव त्रिवेणी पाण्डेय ने कहा कि राज्य और देश के विकास में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। आजाद बिहार के पहले मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास, आर्थिक विकास और सामाजिक उत्थान के लिए अद्भुत काम किया। अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने लगातार बिहार के सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाई। उद्योग का जाल बिछाया, किसानों के उत्थान का कार्य किया, जमींदारी उन्मूलन सहित कई क्रांतिकारी नियम और अधिनियम लाए।

 

उससे बिहार काफी तेजी से आगे बढ़ा, उनके कार्य से प्रेरणा लेकर राज्य को आगे बढ़ाने के लिए हम सब आज भी काम कर रहे हैं।अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठजनों ने कहा कि आजादी से पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री बने श्रीबाबू लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद का निर्वहन किया। संविधान सभा के सदस्य रहे और आजादी की लड़ाई में कई बार जेल गए।

 

आजादी के बाद आधुनिक बिहार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान निभाते हुए समग्र विकास किया। उनके सिद्धांत प्रेरित करते हैं, सभी लोगों को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से सीख लेते हुए अनुसरण करना चाहिए।इस मौके पर रामचंद्र सिंह, देवन्दन सिंह, धनेश्वर यादव, परमेश्वर सिंह,रामलगन राम लोकनाथ प्रसाद, श्रीराम सिंह, श्याम सुन्दर मिस्त्री, रामलखन पाण्डेय आदि उपस्थित थे।

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