औरंगाबाद

अगर ऐसे पुलिस पदाधिकारी रहेंगे तो सही मायने पुलिस पब्लिक का रिश्ता होगा बेहतर

औरंगाबाद।आम तौर पर पुलिस का नाम लेते ही लोगों के चेहरे पर कई तरह के भाव दिखने लगते है और कुल मिलाकर प्रतिशत के हिसाब से देखें तो उसका मतलब यही होता है कि वह एक अच्छा प्राणी नहीं है या उसकी कार्यशैली ऐसी नहीं है कि लोग उनके बारे में कुछ अच्छे शब्द कह सके।

 

पुलिस को लेकर लोग कई तरह के उदाहरण भी प्रस्तुत कर देते है और यह कहते भी सुने जाते है कि भगवान वह दिन न दिखाए जब किसी को पुलिस से पाला पड़े।ऐसी भावनाएं लोगों के दिल में इसलिए पनपती है कि कई पुलिस पदाधिकारी वर्दी की हांक में इंसानियत भूल जाते है।औरंगाबाद में भी कई पुलिस पदाधिकारी ऐसे हैं जिनकी कार्यशैली कही से भी सराहनीय नही है।

 

हालांकि मीडिया से जुड़े लोग खासकर वैसे ही खबर निकालते हैं जहां पुलिस का व्यवहार आम लोगों के लिए गैर जिम्मेदाराना होता है।लगभग दो दशक पीछे जाएं तो यह पाएंगे कि उस वक्त के एसपी रैंक में रहे पुलिस पदाधिकारी अभयानंद ने पुलिस और पब्लिक मित्रता को प्रगाढ़ करने के लिए पुलिस का अर्थ दिया था पुरुषार्थी, लिप्सारहित और सहयोगी।उस वक्त यह स्लोगन चर्चा का विषय बना और यह स्लोगन राज्य के सभी थानों में चिपकाए भी गए और पुलिस ने अपनी कार्यशैली में सुधार भी लाया।

 

लेकिन यह बात अब बाइट जमाने की हो गई।अब तो लोग पुलिस स्टेशन जाने से ही कतराते हैं और यदि जाने की जरूरत पड़ती है तो ऐसे शख्स की तलाश की जाती है जिनका आना जाना थानों में बराबर लगा रहता है या फिर वे थानाध्यक्ष, एसडीपीओ या फिर एसपी के नजदीकी होते हैं।ऐसा इसलिए कि वे पुलिस की प्रताड़ना से बच सके।

 

लेकिन हम यह एक ऐसे पुलिस पदाधिकारी की बात कर रहे है जिसने अपने व्यवहार से दिल्ली से आई एक बुजुर्ग महिला का न सिर्फ दिल जीत लिया बल्कि उन्होंने टोकरी भर आशीर्वाद भी प्राप्त किया।हम बात कर रहे है देव थाना के थानाध्यक्ष मनोज कुमार पांडेय का जिन्होंने पुलिस पब्लिक के रिश्ते को एक उंचाई दी और अपने व्यवहार से उसे स्थापित किया।

 

हुआ यह कि देव थाना क्षेत्र में एक महिला की जमीन को उनके ही केयर टेकर द्वारा हथियाने की कोशिश की जा रही थी और गलत तरीके से उसने अपने नाम से अंचल में मिलकर डिमांड भी कटवा लिया था। महिला को जब इसकी जानकारी मिली तो वह अपने बुजुर्ग पति के साथ औरंगाबाद पहुंची और थानाध्यक्ष से मिलने का समय लिया।थानाध्यक्ष ने महिला को मिलने का समय भी दिया।लेकिन महिला का दुर्भाग्य यह रहा कि वाह औरंगाबाद से देव पहुंची मगर थानाध्यक्ष अचानक किसी आपातकालीन कार्य से कोर्ट में जाना पड़ा और उनकी मुलाकात बुजुर्ग महिला से नही हो सकी।

 

थाने में ऐसे बहुत मामले आते हैं जहां सबसे मिल पाना संभव नही होता।लेकिन जब थानाध्यक्ष श्री पांडेय को इस बात की जानकारी मिली कि दिल्ली से जो महिला उनसे मिलने आई थी वह काफी बुजुर्ग है।महिला के परिजनों ने जब दुबारा थानाध्यक्ष से मिलने की इच्छा जताई तो थानाध्यक्ष ने खुद महिला से जहां वह ठहरी थी वहां जाकर मिले और न मिल पाने का खेद व्यक्त किया।थानाध्यक्ष ने उनकी समस्या सुनी और निराकरण का भरोसा भी दिया।थानाध्यक्ष के इस व्यवहार से बुजुर्ग महिला हतप्रभ हो गई और औरंगाबाद के पुलिस की एक अच्छी छवि लेकर दिल्ली की ओर सुकून के साथ प्रस्थान की।

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