औरंगाबाद

छठ पर्व और हमारी लोक आस्था तथा वर्तमान व्यवस्था

राकेश कुमार,लेखक लोकराज के लोकनायक

औरंगाबाद। आज कार्तिक छठ का नहाय-खाय का दिवस है. आज व्रती स्नान-ध्यान कर दोपहर में शुद्ध-सात्विक भोजन पूरे दिवस में मात्र एक बार ग्रहण करेंगे.

 

शुद्ध-सात्विक भोजन में भात(चावल), चन्ने का दाल और लौकी(कद्दू) की घी में बनी सब्जी शामिल होता है. आँवले और धनिया पत्ती की चटनी बगैर लहसुन के भी शामिल होता है. आज के खाने में प्याज-लहसुन समेत सामान्य नमक का प्रयोग वर्जित होता है. सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है.

इस बार मैं भी छठ व्रती हूँ. इस वजह से मैंने छठ पूजन की विधियाँ व तरीके को क्रमश: साझा करने का फैसला किया है.चूंकि मैं अपने पैतृक गाँव-चनकप से छठ कर रहा हूँ.

 

गाँवों की व्यवस्था में परस्पर सहयोग व चक्रीय निर्भरता का गजब़ का संयोग दिखता है. यहाँ अधिकांश घरों में छठ व्रत हो रहा है. खरना की खीर के लिए नये धान की जरूरत होती है. अब जिसका भी धान का फसल तैयार होता है, वहाँ से धान काट लिया जाता है.यह स्वत: अनुमत व स्वत: सहमत होता है.

 

आज नहाय-खाय के दिन लौकी की जरूरत होती है. किसी को बाजार जाने की जरूरत नहीं होती है. इस बार गाँव में दो घरों में लौकी फल रहा है- मेरे और चौबे जी के घर में. सुबह से ही व्रती परिवार को लौकी ले जाने की सूचना दे दी गयी है. लोग-बाग आ रहे हैं और लौकी लेकर जा रहे हैं.

 

अब गाँवों में बिजली और बारहमासी संपर्क सड़कों का जाल बिछ चुका है. अगर इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा सुलभ हो जाए तो ग्रामीण जीवन और सूचनात्मक व सम्पन्न हो सकती है.साथ ही, कृषि उत्पादों से संबंधित कुटीर व छोटे उद्योगों का विकास कर दिया जाए तो गाँवों से प्रवास रूक जाएगा क्योंकि बच्चों को दसवीं तक की शिक्षा की व्यवस्था यानी निजी विद्यालय व कोचिंग संस्थानों का जाल बनता जा रहा है.

 

और हाँ, अगर गाँवों से ग्रामीण बैठकबाजी वाली राजनीति(Village Politics)का ईश्वर नाश कर दें तो बिहार की गाँवें जीवन-यापन के लिए स्वर्ग बन जाएँगीं.

 

जयप्रकाश नारायण (जेपी) भी ग्रामोदय के रास्ते सर्वोदय चाहते थे. वर्तमान में नवादा जिले कौआकोल प्रखंड के सेखोदेवरा गाँव में जेपी द्वारा स्थापित ‘ग्राम निर्माण मंडल सर्वोदय आश्रम’ इसका दृष्टांत है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

इसे भी पढ़ें

Back to top button

You cannot copy content of this page