औरंगाबाद

नदियों की अविरल धारा के लिए समाजसेवियों ने उठाया कदम,गठित की कमिटी,पारित किए कई निर्णय

औरंगाबाद।अपनी अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही नदियों को जीवन प्रदान करने के लिए शहर के समाजसेवियों ने एक बैठक कर अविरल नदी अभियान चलाने का निर्णय लिया और इससे संबंधित कई निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया।विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता संनजीव नारायण सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक शहर के महराजगंज रोड स्थित एक होटल में आयोजित की गई।इस बैठक में सामाजिक कार्यों से जुड़कर कार्य कर रहे कई संगठन के प्रमुखों ने भाग लिया।

 

बैठक में सर्वप्रथम ‘अविरल नदी अभियान’ की साथर्कता को धरातल पर उतारने के लिए एक समिति बनाई गई जिसमें लोगों को कई महत्पूर्ण जिम्मेवारियां दी गई।इसके पश्चात बैठक में नदियों को जीवन प्रदान करने,इसके अविरलता एवं निर्मलता को बरकरार रखने तथा इसके महत्व को जन जन तक पहुंचाने के लिए पांच वर्षीय कार्य योजनाओं की चर्चा हुई।इसके तहत नदी के किनारे पेड़, पौधे,फूल लगाना।नदी को अपना परिवार समझने के प्रति लोगों को जगरूक करना।नदी के दोनों तरफ छोटे छोटे 500 चेक डैम निर्माण करना। ताकि नदियों का जलस्तर बरकरार रहे और यह किसानों की खेतों के सिचाई में अपनी भूमिका का निर्वहन करे। इसके अतिरिक्त आहर, पोखर के लिए ग्राम पंचायत या सरकार से मदद लेना।

 

 

नदी के प्रवाह को बढ़ाने एवं इसके दोहन को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग को ऐक्टिव करने। लोगों को जल जंगल एवं पहाड़ों की महत्ता को समझाने के लिए जगरूकता अभियान चलाने।शहर के कूड़े कचरे से नदियों को मुक्त कराने की चर्चा जिला प्रशासन एवं नगर परिषद से करने।शहर के नाली के पानियों को स्वच्छ करने के लिए जगह जगह पर सोख्ता का निर्माण करने या नाली के पानी को साफ कर नदियों तक पहुंचाने की चर्च की गई।

 

इसके अतिरिक्त नदियों की पवित्रता एवं इसके धार्मिक दृष्टिकोण को बरकरार रखने के लिए प्रत्येक छठ घाट पर पूर्णिमा के दिन आरती करने, प्रत्येक घाटों का नामकरण भगवान या महापुरुषों के नाम पर करने एवं नदियों से बालू उठाव की सीमा तय करने के लिए राष्ट्रपति,राज्यपाल एवं जलशक्ति मंत्रालय से संपर्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

 

 

बैठक में समिति के सदस्य संजीव नारायण सिंह, प्रोफेसर ज्ञान सिंह, प्रोफेसर जितेंद्र प्रसाद सिंह, मधुसूदन सिंह, अधिवक्ता शुभम सौरभ, विनय कुमार पांडे, शुभम कुमार, विकास प्रताप सिंह, महाराणा प्रताप सिंह, स्वर्णजीत कुमार, सौरभ कुमार देवकांत कुमार, अभिषेक कुमार,  मोनू कुमार, ऋत्विक कुमार आदि मौजूद थे।

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