औरंगाबाद

संप्रदाय कोई भी हो, भारत आज भी सामाजिक सौहार्द से चलता है

औरंगाबाद। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं जिला प्रशासन औरंगाबाद के संयुक्त तत्वधान में समाहरणालय के योजना भवन में सोमवार को जिला स्तरीय पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस पेंटिंग प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं के बीच भारत की संस्कृति एवं यहां के पर्व त्यौहार के महत्व को समझाना और उनकी मेधा शक्ति को विकसित करना है।

योजना भवन में आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में ‘ बिहार का छठ महापर्व’ विषय पर बच्चों की समझ जाने की कोशिश की गई। दो भागों में विभाजित इस प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग और सीनियर वर्ग शामिल थे। जूनियर वर्ग में 9 से 12 कक्षा तथा सीनियर वर्ग में स्नातक एवं उससे ऊपर के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। पेंटिंग प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपनी कूची से लोक उपासना के महापर्व छठ को काफी तरीके से कैनवास पर उतारा।

 

लेकिन इस प्रतियोगिता की विशेषता मुस्लिम छात्राओं ने प्रदर्शित की। मगर यह मुस्लिम छात्राओं के द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स की खूब सराहना की गई। हालांकि इस प्रतियोगिता में कौन पुरस्कृत होगा यह सफल हुआ यह बाद में पता चलेगा। लेकिन अपने कूची के कमाल से दोनों छात्राओं ने यह बताने की कोशिश की कि संप्रदाय कोई भी हो। भारत आज भी सामाजिक सौहार्द से चलता है।छात्राओं ने बताया कि हमारा देश धर्म प्रधान देश नहीं है बल्कि यहां सर्वधर्म समभाव के लोग रहते हैं।

प्रतियोगिता के पश्चात छात्राओं ने अपने बिंदास अभिव्यक्ति के माध्यम से कट्टरपंथियों को यह एहसास करा दिया कि पर्व और त्योहार जातीय और संप्रदाय के बंधन में नहीं बंधे होते हैं। बल्कि दिल से बंधे होते हैं। छात्राओं ने बताया कि छठ पर्व मुस्लिम समुदाय के लोग नही करते है लेकिन कई लोगों के द्वारा इस व्रत को किए जाने के समाचार भी इस वर्ष प्रमुखता से प्रकाशित हुए हैं।

इसके अतिरिक्त इससे संबंधित कई सामग्रियों को व्रतियों के घरों तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाता है।इतना ही नहीं यह समुदाय भी इस पर्व को काफी नजदीक से देखता है समझता है और इसे अंगीकार भी करता है। क्योंकि यही भारत की खूबसूरती है।

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