औरंगाबाद

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में ‘लोकराज के लोकनायक’ पुस्तक पर हुई परिचर्चा

पटना। पटना के गांधी मैदान में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में लेखक से मिलिए कार्यक्रम में रविवार को लोक नायक जयप्रकाश नारायण पर एनबीटी द्वारा प्रकाशित पुस्तक लोकराज के लोकनायक पुस्तक के लेखक राकेश कुमार से पाठकों की मुलाकात हुई. वहीं पुस्तक लोकराज के लोकनायक पर परिचर्चा भी की गई। मुख्य अतिथि लेखक राकेश कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह उनकी पहली पुस्तक है. इस पुस्तक को आजादी के अमृत महोत्सव श्रृंखला के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट ने पिछले वर्ष प्रकाशित किया है।

देशभर के पाठकों ने इस पुस्तक को हाथोंहाथ लिया है। पुस्तक पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस पुस्तक को कोरोना काल के दौरान जयप्रकाश जी से जुड़े स्थलों पर जाकर शोध कर लिखा गया है। इस पुस्तक में जयप्रकाश जी जब हजारीबाग जेल में थे ,तब कैसे और किन लोगों ने उन्हें जेल से भागने में मदद की, इसपर विस्तार से चर्चा की गई है। राकेश कुमार ने कहा कि इस पुस्तक में जेपी के 74 आंदोलन के पहले के और बाद के सभी अनछुए पहलुओं पर लिखने का प्रयास किया है।

 

कार्यक्रम में पुस्तक पर चर्चा करते हुए पत्रकार विद्या सागर ने कहा कि कोरोना काल में जब लोग अपने घरों में कैद थे तो राकेश कुमार लोकनायक से जुड़े स्थलों पर बाइक से ही यात्रा कर शोध कर रहे थे। कोरोना काल समाप्ति तक इन्होंने पूरी किताब लिख दी। यह पुस्तक जेपी और जेपी आंदोलन के कई अनछुए पहलुओं पर लिखी गई जो इसे अन्य पुस्तकों से अलग करती है।

शोध पर आधरित इस पुस्तक में जेपी के रसोईया से लेकर आंदोलन कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर समेत तमाम लोगों के संस्मरणों को शामिल किया गया है। वहीं कवि नागार्जुन द्वारा जेपी आंदोलन में रिक्शे के हुड पर बैठकर गाये गये कविता का भी जिक्र पुस्तक में है।कार्यक्रम में अतिथि ऑल इंडिया हॉकर्स फोरम के राष्ट्रीय महासचिव इरफान अहमद फातमी ने लेखक राकेश कुमार को बेहतर पुस्तक लेखन के लिए बधाई दी।

 

कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार डॉ. विनय कुमार विष्णुपुरी व धन्यवाद ज्ञापन व्यंग्यकार श्रीकांत व्याश ने किया।

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