औरंगाबाद

औरंगाबाद में जबरन धान के फसल को काटने पर रोक लगाने गई पुलिस टीम पर हमला 10 पुलिसकर्मियों सहित 15 घायल

औरंगाबाद। भले ही पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन भूमि विवाद को सुलझाने का प्रयास क्यों न कर ले। लेकिन यह समस्या नासूर बनकर हिंसक होती जा रही है। ऐसा ही मामला गोह थाना क्षेत्र के दरधा एवं कुरमाइन गांव के बीच बुधवार को देखने को मिला जहां 11 एकड़ में लगे धान की फसल को जबरन काट रहे लोगों को मना करने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। ग्रामीणों के आक्रोश को शांत करने के लिए पुलिस की तरफ से भी हल्का बल प्रयोग किया गया। लेकिन इस क्रम में चले लाठी-डंडे में पांच महिला तथा पांच पुरुष पुलिसकर्मी सहित कुल 15 लोग घायल हो गए। जिनका इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोह में चल रहा है।

घटना के बाद प्रशासन ने धान की कटाई पर रोक लगा दिया है। वही जानकारी मिलते ही दाउदनगर एसडीपीओ कुमार ऋषिराज दल बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और मामले को शांत कराया। फिलहाल इस को लेकर गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस कैंप कर रही है।

 

घायलो में गोह थाना के एएसआई बिकाऊ राम, सिपाही अंबिका कुमारी, राज कुमार, प्रियंका कुमारी, रेखा कुमारी, चांदनी कुमारी, लवली आनंद, धर्मेंद्र कुमार, अजय कुमार एवं आर्यन कुमार शामिल है।पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दरधा गांव की बुचुन कुमारी, पुतुल कुमारी, प्रेमलता कुमारी, सौरभ कुमार एवं रीना कुमारी घायल हुई हैं। इनमें बुचुन कुमारी, पुतुल कुमारी एवं प्रेमलता कुमारी को बेहतर इलाज के लिए गया रेफर किया गया है।

गोह के अंचल अधिकारी मुकेश कुमार एवं गोह थानाध्यक्ष शमीम अहमद ने बताया कि दरधा गांव के कुछ लोगो द्वारा विवादित जमीन पर लगी धान की फसल जबरन काटे जाने की सूचना मिली। सूचना पर पुलिस पदाधिकारी के साथ सशस्त्र पुलिस बल को लेकर मौके पर पहुंचे।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के पारित आदेश के बाद वीरेंद्र कुमार सिन्हा के पक्ष में जिला प्रशासन के आदेश पर धान रोपनी व कटाई का आदेश दिया गया था। उक्त जमीन पर धान की रोपनी स्थानीय पुलिस के निगरानी में किया गया था एवं उक्त जमीन की देखभाल के लिए महिला एवं पुरुष बल के जवान तैनात किए गए थे।

 

लेकिन धान की कटनी दूसरे पक्ष के द्वारा जबरन की जाने लगी और जब उसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की तब ग्रामीण टूट पड़े।वहीं दूसरे पक्ष के नंदलाल पासवान ने बताया कि उक्त जमीन पर धान की रोपनी हमलोगों के द्वारा किया गया था। जिसे स्थानीय प्रशासन ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर खेत को पुनः जुतवा कर धान की रोपनी कराई गई थी।

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