औरंगाबाद

संस्कार भारती ने धूमधाम से मनाया राष्ट्रीय संरक्षक का जन्मदिन

औरंगाबाद। संस्कार भारती महानगर के महाविद्या कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय पर संस्था के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पद्मश्री बाबा योगेंद्र बाबा जन्मदिन के उपलक्ष में रविवार को 99वां जन्मदिन बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया। साथ साथ देश देश के कई जगहों पर उनका जन्मदिन हर्षोल्लास से मनाया गया। इसी दौरान संस्कार भारती औरंगाबाद इकाई के कार्यकर्ताओं ने विधि-विधान से हवन पूजन कराकर सामूहिक पूर्णाहुति के साथ बाबा योगेंद्र दा के जीवनी पर विचार गोष्ठी कर बाबा का जन्मदिन मनाया।

 

संस्था के अध्यक्ष पंकज पटेल ने बताया कि बाबा योगेंद्र दा कलाकारों में से एक बहुत बड़ा कलाकार है। उनका जीवन का बखान करना बहुत ही कठिन है। कला की साधना अत्यन्त कठिन होता वर्षों के अभ्यास एवं परिश्रम से कोई कला सिद्ध होती है, पर कलाकारों को बटोरना उससे भी अधिक कठिन है, क्योंकि हर कलाकार के अपने नखरे रहते हैं। ‘संस्कार भारती’ के संस्थापक श्री योगेन्द्र बाबा ऐसे ही कलाकार हैं, जिन्होंने हजारों कला साधकों को एक माला में पिरोने का कठिन काम कर दिखाया है। योगेन्द्र जी शुरू से ही बड़े कलाकारों के चक्कर में नहीं पड़े। उन्होंने नये लोगों को मंच दिया और धीरे-धीरे वे ही बड़े कलाकार बन गये। इस प्रकार उन्होंने कलाकारों की नयी सेना तैयार कर दी।

अन्तःकरण के शब्द को जब संघ नेतृत्व ने स्वर दिया

शीर्ष नेतृत्व ने योगेन्द्र जी की इस प्रतिभा को देखकर 1981 ई0 में अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती का गठन कर उसका कार्यभार उन्हें सौंप दिया गया। संस्था के उपाध्यक्ष सचिन सिन्हा ने बताया कि बाबा का जीवन शुरू से ही संघर्षमय रहा है 7 जनवरी, 1924 को बस्ती, उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध वकील बाबू विजय बहादुर श्रीवास्तव के घर जन्मे योगेन्द्र बाबा जी के सिर से दो वर्ष की अवस्था में ही माँ का साया उठ गया। फिर उन्हें पड़ोस के एक परिवार में बेच दिया गया। इसके पीछे यह मान्यता थी कि इससे बच्चा दीर्घायु होगा। उस पड़ोसी माँ ने ही अगले दस साल तक उन्हें पाला। वकील साहब कांग्रेस और आर्यसमाज से जुड़े थे। जब मोहल्ले में संघ की शाखा लगने लगी, तो उन्होंने योगेन्द्र बाबा को भी वहाँ जाने के लिए कहा।

 

 

छात्र जीवन में उनका सम्पर्क गोरखपुर में संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख से हुआ। योगेन्द्र जी यद्यपि सायं शाखा में जाते थे, पर नानाजी प्रतिदिन प्रातः उन्हें जगाने आते थे, जिससे वे पढ़ सकें। एक बार तो तेज बुखार की स्थिति में नानाजी उन्हें कन्धे पर उठाकर डेढ़ कि.मी. पैदल चलकर पडरौना गये और उनका इलाज कराया। इसका प्रभाव योगेन्द्र जी पर इतना पड़ा कि उन्होंने शिक्षा पूर्ण कर स्वयं को संघ कार्य के लिए ही समर्पित करने का निश्चय कर लिया।

 

संस्था के सचिव चंदन गोकुल ने बताया कि आज के दिन कलाकारों को एक साथ लाना बहुत ही कठिन है। सभी कलाकारों को बाबा जीवन से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। बाबा के जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है। हम सभी कलाकार उनके जन्मदिन पर ईश्वर से कामना करते हैं कि उनका कुशल में जीवन ऐसे ही बना रहे और हम लोगों का मार्गदर्शन उनका मिलता रहे। बाबा का जन्मदिन पर बहुत बड़ा कार्यक्रम करना तय हुआ था परंतु वैश्विक महामारी करोंना के कारण फिलहाल सरकार के अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। उम्मीद है कि इस करोनकाल के बाद भगवान सूर्य मंदिर में बाबा के जीवनी के उपलक्ष में एक सांस्कृतिकमय कार्यक्रम किया जाएगा।

 

विचार गोष्ठी में उपस्थित प्रांतीय अधिकारी विकास मिश्रा, संस्था के सह-सचिव मृत्युंजय कुमार, कोषाध्यक्ष मेघनाथ आजाद, मीडिया प्रभारी अमन राज, कार्यालय प्रमुख अभिषेक कुमार, पवन, मोनू, रिकी, सुधांशु, रोहित, प्रीतम, खुशी, अनोखी, पायल,  हनी इत्यादि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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