औरंगाबाद

सिन्हा कॉलेज के कॉमर्स भवन के निर्माण में नींव खुदाई में निकला पंचमुखी शिवलिंग,शिवलिंग पर उकेरी गई है तथागत की तस्वीर

सिन्हा कॉलेज के कॉमर्स भवन के निर्माण नींव खुदाई में निकला पंचमुखी शिवलिंग

औरंगाबाद। शहर के प्रतिष्ठित महाविद्यालय सिन्हा कॉलेज में कॉमर्स भवन के निर्माण के दौरान नींव खुदाई के दौरान पंचमुखी शिवलिंग मिलने से लोग इस बात को लेकर अचंभित हो गए और इस बात की चर्चा में लग गए कि आखिर कई वर्षों से वीरान पड़े इस जमीन के नीचे शिवलिंग कहाँ से आया और वह भी काले और भूरे रंग की मिश्रित पत्थर से पूरी नक्काशी के साथ बनी हुई।शिवलिंग के मिलते ही वहां मौजूद कर्मियों ने उसे उठाकर सुराजशीत स्थान पर रखा और जैसे ही इसके मिलने की जानकारी शुक्रवार को हुई लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग मूर्ति की आराधना अपने अपने तरीके से करने लगे।

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भवन निर्माण के कार्य मे लगे संवेदक ने बताया कि चार दिन पूर्व जब पाइलिंग के लिए होल किये जा रहे थे उसी वक्त जमीन से लगभग चार फीट नीचे मशीन का ब्लेड टकराया और ऐसा लगा कि कोई बड़ा पत्थर शायद नीचे दबा हो।जब लोहे की खंती से खोदा जाने लगा तो एक फुट ऊंची पंचमुखी शिवलिंग प्राप्त हुई और इसकी सूचना।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ वेदप्रकाश चतुर्वेदी एवं एकाउंटेंट मनोज कुमार सिंह को दी गयी।

 

इस संबंध में महाविद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि भवन निर्माण के लिए किए जा रहे खुदाई के क्रम में एक शिवलिंग की प्राप्ति हुई है जो एक विशेष चमकीली धातु की बनी हुई है।उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है कि प्राचीन काल मे उक्त स्थल पर टेकारी महाराज के कार्यालय थे और यहां राजस्व वसूली को लेकर उनके कर्मी रहा करते थे।सम्भव हो कि यह प्रतिमा उनके द्वारा स्थापित की गई हो जो कालांतर में दब गई हो।लेकिन मूर्ति के निर्माण की कारीगरी एवं इसकी भव्यता शायद इतिहास के कई पन्नों को खोले यह शोध का विषय है।प्राचार्य ने कहा कि प्राप्त मूर्ति की वास्तविकता की जानकारी के लिए पुरातत्व विभाग से संपर्क किया जाएगा।

 

इधर पंचमुखी शिवलिंग मिलने से आसपास के क्षेत्रो में इसकी चर्चा जोरों पर है और लोग इसे सूर्य मंदिर के कालखंड से भी जोड़कर देख रहे है।वही कुछ लोग यह भी चर्चा करते नजर आ रहें हैं कि पंचमुखी शिवलिंग में उकेरी गई पांच आकृतियां तथागत की है जो शाक्य वंश से जुड़ी कई अनकहे और अनगढ़े इतिहास के परत को खोल सकती है।बहरहाल इस मूर्ति को लेकर काफी चर्चा है लेकिन अब लोगों की निगाहें पुरातत्व के जानकारों पर टिकी है जो इस मूर्ति की वास्तविकता से अवगत कराएगी।

 

 

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