औरंगाबाद

न्यायालय में ड्यूटी नहीं बजाई तो चिकित्सकों का वेतन कटा, हड़ताल पर गए सदर अस्पताल के सभी चिकित्सक मरीजों की बढ़ी परेशानी

चिकित्सकों का आरोप, सिविल सर्जन ने दी प्राथमिकी करने की धमकी कहा करें न्यायालय के कार्य से मुक्त तभी काम पर वापस आएंगे सभी चिकित्सक

औरंगाबाद। राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग में सुधार के दावे तो करती जरूर है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चिकित्सक को उनके कार्यों का उचित मेहताना नही मिल पाता है और यही कारण है कि अस्पताल प्रबंधन के रवैए से नाखुश हुए औरंगाबाद सदर अस्पताल के चिकित्सक सोमवार की दोपहर से हड़ताल पर चले गए और अपनी समस्याओं को लेकर सीएस कार्यालय में बैठ गए।

इधर चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने के कारण दूर दूर से आए मरीज 2-2 घंटे तक पंक्ति में खड़े रहे और चिकित्सकों का बाट जोहते रहे मगर उन्हे चिकित्सक कही नही मिले।इधर नबीनगर से पोस्टमार्टम कराने आए परिजनों को को भी पोस्टमार्टम के लिए घंटो इंतजार करना पड़ा।

एक मरीज को कॉल पर सदर अस्पताल में पहुंचे राहुल गांधी युथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज रहमान उर्फ सल्लू खान ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन सरकार को बदनाम करने की कोशिश में लगी हुई है।पूर्व में ही इसकी सूचना उनके द्वारा जिलाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को दी गई थी और यह जानकारी दी गई थी कि वेतन भुगतान मामले को लेकर चिकित्सक 4 जुलाई से हड़ताल पर चले जायेंगे।लेकिन किसी ने इस पर संज्ञान नहीं लिया और आज स्थिति यह हो गई कि चिकित्सक हड़ताल पर चले गए।

इधर इस मामले में चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा ड्यूटी नॉर्म्स के हिसाब से सभी चिकित्सकों से न सिर्फ ज्यादा काम लिया जा रहा है।बल्कि बेवजह काम का बोझ अधिक दिया जा रहा है।जबकि उनके द्वारा ज्यादा काम लिया जा रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि आकस्मिक कार्य के अलावा उनके द्वारा पोस्टमार्टम, मेडिको लीगल केस, इंज्यूरी एवं मेडिकल बोर्ड के काम करने के कारण सभी चिकित्सक न्यायालय कार्य करने में असमर्थ हैं। ऐसी स्थिति में सिविल सर्जन द्वारा न्यायालय में कार्य न करने के कारण 2 दिनों का वेतन काट लिया गया।

चिकित्सकों ने बताया कि आज जब अपने वेतन कटौती की जानकारी लेने के लिए सिविल सर्जन के कार्यालय गए और उनसे मिलने का प्रयास किया तो उनसे मुलाकात नहीं हुई। लेकिन काफी देर बाद जब सीएस पहुंचे उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आप लोग काम नहीं करेंगे तो प्राथमिकी कर दी जाएगी और मुझे वेतन काटने का अधिकार है। इतना कह कर उन्होंने सभी चिकित्सकों को चेंबर से भगा दिया।

चिकित्सकों ने बताया कि सिविल सर्जन कटे हुए वेतन को वापस करने का लिखित आश्वासन दें एवं आकस्मिक कार्य में लगे सभी चिकित्सकों को न्यायालय कार्य से मुक्त कर किसी एक चिकित्सक की ड्यूटी वहां लगाएं तो सभी कार्य पर वापस आएंगे नहीं तो कार्य बहिष्कार करना उनकी मजबूरी है।

इधर सदर अस्पताल में चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने सर्वाधिक चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी जब सिविल सर्जन से ली गई उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल के चिकित्सीय व्यवस्था बिल्कुल दुरुस्त कर ली गई है और कई चिकित्सक प्रखंड अस्पतालों से बुला लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सक कार्य ना करके मनमानी कर रहे हैं।वेतन भुगतान को लेकर उनसे रेजिडेंशियल प्रमाण पत्र मांगा गया था। क्योंकि ऐसी सूचना थी कि कई चिकित्सक मुख्यालय में नहीं रहते हैं।

जब उनके द्वारा रेजिडेंशियल प्रमाण पत्र दिया गया तो वेतन का भुगतान कर दिया गया। सीएस ने बताया कि चिकित्सकों को रोस्टर के हिसाब से न्यायालय में ड्यूटी लगाई गई थी। उसके अनुसार एक चिकित्सक को प्रत्येक 15 दिन पर न्यायालय में ड्यूटी करना था। मगर चिकित्सक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। ऐसी स्थिति में उनका वेतन काटना पड़ा।

इस मामले को लेकर सिविल सर्जन, एसीएमओ डॉ किशोर कुमार एवं संचारी रोग पदाधिकारी डॉ रवि रंजन सोमवार की शाम सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बैठकर मरीजों की जांच की। सिविल सर्जन ने कहा कि चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने की जानकारी विभाग को दी जाएगी और वहां से आए दिशा निर्देश के अनुसार आगे का कार्य किया जाएगा।

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