औरंगाबाद

पढ़ाई कराने के साथ साथ शिक्षक,शिक्षा सेवक एवं तालीमी मरकजों को नशा सेवन और नशा का कारोबार करने वालों की पहचान बताने वाले आदेश का शिक्षक संगठन ने किया निंदा

औरंगाबाद। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के हवाले से जानकारी देते हुए जिला अध्यक्ष औरंगाबाद रमेश कुमार सिंह प्रधान सचिव विनय यादव जिला कोषाध्यक्ष सुनील कुमार सिंहवऔर जिला मीडिया प्रभारी अशोक पाण्डेय ने प्रेस बयान जारी कर बताया कि अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग बिहार पटना के द्वारा जारी पत्र में बिहार के शिक्षकों को नशा मुक्ति अभियान को गति देने वाले समाज में जागरूकता पैदा करने के लिए बिहार के पंचायती राज एवं नगर निकाय के अधीन नियुक्त शिक्षकों, शिक्षा सेवकों एवं तालीम मरकजो को निर्देश दिया गया है कि अपने क्षेत्र में नशा करने वाले और शराब की आपूर्ति करने वाले लोगों की पहचान कर पत्र में जारी मोबाइल नंबर पर सूचना दें एवं सूचना देने वाले का पहचान गोपनीय रखा जाएगा, सरकार की इस तुगलकी फरमान का बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ कड़ी आपत्ति दर्ज करती है।

 

 

संघ के नेताओं ने कहा कि इस तरह के जारी तुगलकी फरमान का बिहार के शिक्षक विरोध करते हैं। शिक्षक का काम है विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना ना कि शराब पीने वाला और शराब बेचने वालों को पकड़वाना। शिक्षक शराबी और शराब माफिया का दुश्मनी क्यों लेगा जब शराब बेचने और पीने के लिए रोकने सभी तंत्र फेल हो गए तो सरकार यह जिम्मेवारी शिक्षकों को देने का काम कर रही है।

 

 

बिहार में शराब ढूंढने का जब सब तंत्र फेल हो गया है तो अब सरकारी स्कूल के शिक्षकों के साथ साथ शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज के सेवकों को शराब ढ़ूढ़ने के काम में लगाने का आदेश जारी कर दिया है।
जिस टीचर का काम बच्चों को पढ़ा कर बिहार औऱ देश का भविष्य संवारना है वे शराब खोजेंगे।

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