औरंगाबाद

औरंगाबाद के निर्वाचक सूची में लिंगानुपात 881 से बढ़कर हुआ 885,राज्यस्तरीय लिंगानुपात की बराबरी करने की दिशा में अग्रसर की कवायद में है निर्वाचन विभाग

औरंगाबाद। औरंगाबाद की निर्वाचक सूची में लिंगानुपात 881 से बढ़कर 885 हो गयी है जिसको लेकर जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग उत्साहित है और इस लिंगानुपात को जनसंख्या के आंकड़ों की बराबरी को लेकर प्रयत्नशील है।गौरतलब है कि जिले के निर्वाचक सूची में हुई बढ़ोतरी के बाद जिला निर्वाचन विभाग लिंगानुपात की स्थिति में सुधार की कवायद कर रहा है और इसके लिए सभी प्रखंडों के बीएलओ को आवश्यक निर्देश दिया है।

 

 

जानकारी देते हुए उप निर्वाचन पदाधिकारी जावेद इकबाल ने बताया कि अभी जिले में लिंगानुपात 926 है और एक स्वस्थ निर्वाचन के लिए यह आवश्यक है कि जो लिंगानुपात जनसंख्या के आंकड़ो में है वही निर्वाचक सूची में हो। लेकिन जब पिछले विधानसभा चुनाव के बाद जब निर्वाचक सूची का प्रकाशन हुआ तो यह 881 था।लेकिन उसके बाद सतत अद्यतीकरण के कार्य हुए और नवम्बर 2021 में जब प्रारूप का प्रकाशन हुआ तो यह 881 से बढ़कर 884 हो गया।लेकिन 1 नवम्बर से लेकर 30 नवम्बर तक विभिन्न मतदान केंद्रों से जब आवेदन प्राप्त हुए और उज़के बाद 5 जनवरी 2022 को इसका अंतिम प्रकाशन हुआ तो यह लिंगानुपात 884 से बढ़कर 885 हो गया।जिसमें सबसे अच्छा लिंगानुपात गोह में पाया गया जहाँ यह 915 है।

 

 

इसके लिए वहां के बीएलओ संतोष कुमार ठाकुर को बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिसेज अवार्ड के लिए राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर पटना में राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया जा चुका है।उप निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि यह जिले के लिए गर्व का विषय इसलिए है कि पूरे बिहार में दस लोगों को ही इसके लिए चयनित किया गया था।उन्होंने बताया कि जिले के अन्य प्रखंडों के लिंगानुपात पर यदि गौर करें तो नबीनगर का 861, रफीगंज का 883, कुटुंबा का 869 है।जहां अभी सुधार की जरूरत है और इसके लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में सभी बीएलओ एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर लिंगानुपात को बढ़ाने के लिए कई निर्देश दिए गए हैं।

 

 

उन्होंने बताया कि बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से यह अपील की गई है कि उनके द्वारा जो बीएलए बनाए जाते है उन्हें स्प्ष्ट निर्देश दिए जाएं कि वह वैसे महिलाओं एवं युवतियों के नाम जुड़वाए जिनका नाम किसी कारण से मतदाता सूची में शामिल नही हो सका है।उन्होंने बताया कि आमतौर पर 18 वर्ष की उम्र के युवाओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने को लेकर रुचि नही रहती है जिसके लिए महाविद्यालयों में कैम्पस एम्बेसडर बनाए गए है जो उन्हें जागरूक कर सके और उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज कराएं।

 

 

उपनिर्वाचन पदाधिकारी ने बताया है कि अभी दुहरी प्रविष्टियों के विलोपित किये जाने की प्रक्रिया चल रही है जिससे उम्मीद है कि विलोपन के बाद लिंगानुपात की स्थिति और भी बेहतर होगी और यह जिला राज्य के लिंगानुपात की स्थिति से बेहतर होगा।

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