औरंगाबाद

सदर अस्पताल में बापू की पुण्यतिथि पर कुष्ठ निवारण दिवस का हुआ आयोजन, ली गयी स्वच्छता की शपथ

– जिला पदाधिकारी, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने बापू के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किए.
– कुष्ठ रोगियों के प्रति आदर का भाव रखने अपने वातावरण को स्वच्छ रखने का शपथ लिया गया.
– कुष्ठ रोगियों को उपहार वितरित किए गए.
– वक्ताओं ने बताया कि कुष्ठ रोग का निवारण संभव है. इलाज कराने से पूर्णत: रोग ठीक हो सकता है. अन्यथा अपंगता हो सकती है.
– कुष्ठ रोगियों को तिरस्कार नहीं प्यार चाहिए.

औरंगाबाद। रविवार 30 जनवरी को संपूर्ण भारत ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 74वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया. इस अवसर पर औरंगाबाद सदर अस्पताल में भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की उपस्थिति एवं नेतृत्व में उपस्थित जन समूह द्वारा बापू के चित्र पर पुष्पहार एवं पुष्प श्रद्धावनत अर्पित किए गए. वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए व्यक्ति विशेष की प्रतिबद्धता हेतु सामूहिक शपथ ग्रहण हुआ. कुष्ठ रोगियों को उपहार वितरित किए गए.

 

 

इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए जिला पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि कुष्ठ रोग संक्रमण से होने वाली एक बीमारी है. यह बीमारी है माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है. इलाज कराने से यह पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है. कुष्ठ रोग का इलाज नहीं करने पर दिव्यांगता आ सकती है.

 

 

सिविल सर्जन औरंगाबाद द्वारा बताया गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रयासों का परिणाम रहा कि अब कुष्ठ रोगियों को सामाजिक बहिष्कार का सामना नहीं करना पड़ता है. समाज का अधिकतर तबका अब समझ गया है कि कुष्ठ रोग कोई दैवीय आपदा नहीं बल्कि एक बीमारी है जो कि किसी को भी हो सकती है और इसका इलाज संभव है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा कुष्ठ रोगियों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने के प्रयासों की वजह से ही हर वर्ष 30 जनवरी उनकी पुण्यतिथि को ‘कुष्ठ रोग निवारण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

 

 

मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी -सह- कुष्ठ रोग निवारण पदाधिकारी डॉक्टर किशोर कुमार द्वारा बताया गया कि महात्मा गांधी का सपना था कि भारत देश कुष्ठ रोग से मुक्त हो तथा उन्होंने संदेश दिया था कुष्ठ रोगियों को सामाजिक तिरस्कार नहीं बल्कि प्यार चाहिए. इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उनकी पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष कुष्ठ रोगियों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. महात्मा गांधी ने अपने व्यवहार से यह साबित किया था कि कुष्ठ रोग स्पर्श करने अथवा छूने से नहीं फैलता है.

 

 

विदित हो कि भारत को आजादी दिलाने वाले सत्य अहिंसा के व्रती, स्वच्छता पसंद एवं कुष्ठ रोगियों के प्रति दया भाव रखने वाले महामानव आदरणीय बापू की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी.

 

 

कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ कुमार वीरेंद्र प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. किशोर कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मिथिलेश प्रसाद सिंह, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनु कुमारी, सदर अस्पताल औरंगाबाद की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ऋचा, जिला लेखा प्रबंधक अश्विनी कुमार, यूनिसेफ के पदाधिकारी कामरान खान, आयुष्मान भारत के डीपीसी बबन भारती, केयर के पदाधिकारी अन्यास कुमार सहित सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय एवं सदर अस्पताल के विभिन्न स्तर के कर्मी उपस्थित रहे.

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