औरंगाबाद

बालू के अवैध कारोबार में अब किसकी चढ़ेगी बलि

केशव कुमार सिंह की रिपोर्ट

औरंगाबाद। जिले में सोन व अन्य नदियों से निकल रही बालू के सोने के चक्कर मे न जाने कितने लोगों की जान आफत में डाल दिया हैं।फिर इस धंधे से जुड़े लोग इसके पीछे से भाग नही रहे हैं, बल्कि लोगों के जान के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिए हैं। ऐसे में यदि सरकार व कानून के रक्षक संयम से काम नही लेंगे तो आम लोगों की जीवन दिन प्रतिदिन बर्बाद होने से कोई रोक नही सकता?

 

 

यही कारण रहा हैं कि पूर्व में बारूण थानाध्यक्ष रहे राजू कुमार, सीओ का तबादला कर दिया गया तो वही औरंगाबाद के तत्कालीन डीटीओ रहें अनिल कुमार सिन्हा, एसडीपीओ अनूप कुमार सिन्हा के प्रति निगरानी विभाग की टीम ने छपेमारी करते हुए न सिर्फ एफआईआर दर्ज की हैं।बल्कि आय से अधिक मामले में जेल भेजे जाने की कारववाई में जुटी हुई हैं।ऐसे में कई सफेदपोश का भी नाम सामने आया हैं।

 

 

जब कुछ दिन पूर्व दाउदनगर थाना क्षेत्र में एक मुंशी की हत्या बालू घाट पर कर दी गई औऱ रुपये लूट लिए गए तो दाउदनगर थाना में कार्यरत तत्कालीन दारोगा वीरेन्द्र पासवान ने उन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए शमशेर नगर के एक टोला में गये हुए थे।तभी उसने दो लोगों को गिरफ्तार कर रखा था।तभी गांव के लोगों ने पुलिस बलों पर जानलेवा हमला बोल दिया।इसी क्रम में उक्त दारोगा जख्मी हो गए और इलाज के क्रम में उनकी जान भी चली गई।ऐसे में दारोगा जी का बेटी का हाथ पीला करने का सपना भी अधूरा ही रह गया।जो दारोगा जी का इकलौती पुत्री थी और एक बड़ी उम्मीद के साथ ही अपनी बेटी की शादी दाउदनगर थाना क्षेत्र के रपूरा गांव में भी तय कर चुके थे।

 

 

बालू के खेल में कारोबारियों के कोप का शिकार हुए दिवंगत दारोगा के पुत्री की 16 फरवरी 22 को बरात आने वाली थी।यही नही दारोगा जी का छुट्टी एक फरवरी से 20 फरवरी तक मंजूरी भी मिल गया था।ऐसे में अब दारोगा जी के बेटी का हाथ कौन पिला कर सकेगा।ऐसे में आने वाला समय ही बता सकेगा।

 

 

जिले में सिर्फ बालू ही नही बल्कि कई वैध व्यसाय से भी वसूली का कारोबार चरम पर है। क्योंकि परिवहन विभाग द्वारा लाइसेंस प्राप्त प्रदूषण जांच मोबाइल वाहन चलाने वाले भी नजराना देने को मजबूर है और न देने पर उनकी वाहनों को अनाप शनाप आरोप लगाकर पकड़ लिया जा रहा है।ऐसे में सोचा जा सकता है कि भ्र्ष्टाचार की जड़े कितनी मजबूत होती जा रही है।जब तक ऐसे कार्यों पर रोक नही लगेगी और शासनिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था इस जकड़न से मुक्त नही होगी।तबतक कई बीरेंद्र शहीद होते रहेंगे।

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