औरंगाबाद

पुनपुन नदी पर बन रहे हमीदनगर बराज का लगभग कार्य हुआ पूर्ण

औरंगाबाद। जिले के गोह प्रखंड अंतर्गत हमीदनगर गांव के पास पुनपुन नदी पर स्थित पुनपुन बराज योजना में 178 मीटर लंबे बराज का निर्माण लगभग पूर्ण कर लिया गया है। इसमें 14 गेटों (12 water way एवं 02 under sluice) निर्मित है। बराज के अप स्ट्रीम में सिर्फ दायां भाग तरफ एक हेड रेगुलेटर का निर्माण किया गया है जिससे एकमात्र निसृत पुनपुन दायां मुख्य नहर का निर्माण किया जाना है।

 

 

इस योजना का शुभारंभ वर्ष 2005 में किया गया था और वर्तमान में इसकी प्रशासनिक स्वीकृति की राशि 658.12 करोड़ के लिए विभागीय पत्रांक-483, दिनांक 18.03.2010 से प्राप्त है एवं अद्यतन व्यय कार्य मद एवं भू अर्जन मद सहित 458.44 करोड़ रुपए है।

 

 

पुनपुन बराज के संरचना का काम लगभग 98 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है एवं रिवर जैकेटिंग का कार्य 70 प्रतिशत पूरा हुआ है। दायां गाइड एवं एफलक्स बांध का कार्य 11.63 प्रतिशत, बायां गाइड एवं एफलक्स बांध 12.81 एवं रिंग बांध का कार्य 6.66 प्रतिशत किया गया है। जमीन के भू अर्जन की समस्या के कारण नहर निर्माण का कार्य बाधित है।

 

 

परंतु बराज की संरचना बनकर तैयार है। वहीं भू अर्जन अवरोध के कारण पुनपुन शाखा नहर में एकमात्र cross drainage का कार्य आंशिक रूप से किया गया है शेष कार्य बंद है। किंजर वितरणी के टेल एंड में लगभग 3 किलोमीटर की लंबाई में मिट्टी कार्य एवं कुछ संरचनाओं का कार्य कराया गया है शेष कार्य बंद है।

 

 

पुनपुन बराज योजना में भू अर्जन की बाधा का कारण भूमि का वर्गीकरण कर आज के दर पर चार गुना राशि की ग्रामीणों की मांग। सभी भूस्वामी जिन्होंने मुआवजा भुगतान प्राप्त कर लिया है वे भी आज के सर्किल रेट पर चार गुना मुआवजा राशि के भुगतान की मांग कर रहे हैं। दूसरी समस्या यह है कि अर्जनाधीन भूमि के अंतर्गत मालिक/वकास्त भूमि का मुआवजा रैयतीकरण कराकर भुगतान किया जाना।

 

 

दूसरी तरफ कैरियर कैनाल के कृषकों द्वारा इस योजना से पटवन की मांग की जा रही है, इसके लिए विभाग द्वारा उद्दवह सिंचाई योजना के माध्यम से पटवन हेतु प्रावधान किया गया है। विदित हो कि पुनपुन बराज योजना से निःसृत दायां मुख्य नहर एक कैरियर नहर है।

 

 

फलस्वरूप बराज एवं मुख्य नहर के समीप स्थित गांवों को सिंचन लाभ नहीं मिल पाने के कारण बराज निर्माण एवं नहर निर्माण में भू अर्जन प्रक्रिया/बराज निर्माण/नहर निर्माण आदि कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा असहयोगात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। इसलिए मुख्य नहर के दोनों तरफ 600-600 मीटर की दूरी तक लिफ्ट सिंचाई की व्यवस्था करने की योजना बनाई गई है।

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