औरंगाबाद

महिलाओं के लिए वरदान बनकर आई हैं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ कुमारी शशि -राजेश रंजन उर्फ चुन्नू

(राजेश रंजन उर्फ चुन्नू)

औरंगाबाद। ऐसे तो शहर में कई महिला चिकित्सक है और सभी की अपनी अपनी खासियत है।लेकिन शहर में एक ऐसी भी महिला चिकित्सक है जो किसी महिला मरीज के लिए वरदान से कम नही हैं।यह बात शहर के प्रसिद्ध व्यवसायी एवं अभिषेक बजाज के मालिक राजेश रंजन उर्फ चुन्नू ने emaatimes से एक बातचीत के दौरान कही।श्री चुन्नू ने बताया कि इन्होंने चिकित्सा को व्यवसाय नही बल्कि धर्म और सेवा माना है और महिला रोगियों को भगवान का दर्जा दिया है।क्योंकि यदि उनकी चिकित्सीय सेवा से किसी का भला होता है तो उससे बड़ा पुण्य कुछ नही होता है।

 

श्री चुन्नू ने बताया कि महिला चिकित्सक डॉ शशि न सिर्फ अपने मरीज का विशेष केयर करती है बल्कि यदि उन्हें यह पता चल जाए कि कोई मरीज पैसे की कमी से ग्रसित है तो उसकी मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।अभी हाल में ही उनके द्वारा सदर प्रखंड के रजोई गांव में एक स्वास्थ्य जागरूकता सह निशुल्क जांच शिविर का आयोजन किया गया था जहां न सिर्फ दो सौ से अधिक महिलाओं की निशुल्क जांच की गई बल्कि हजारों रुपये की दवा का भी वितरण किया गया और सभी दवाएं फिजिशियन सैम्पल न होकर बाजार से खरीदीं गई थी।

वही इसी क्रम में जब महिला चिकित्सक डॉ कुमारी शशि से मुलाकात हुई तो उन्होंने महिलाओं से संबंधित कई बीमारियों पर खुलकर चर्चा की और कहा कि महिलाओं में अधिकतर बीमारी उनकी बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान है। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को अपने दैनिक कार्य करने, बिमारियों की रोकथाम तथा सुरक्षित व स्वस्थ प्रसव के लिए अच्छे भोजन की आवश्यकता होती है। लेकिन वे इसको नजरअंदाज कर के चलती है और यही कारण है कि पुरे संसार में किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की तुलना में महिलाओं को कुपोषण का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है। इसके कारण थकावट, कमजोरी, अशक्तता और बुरा स्वास्थ्य हो सकता है।

 

भुखमरी और अच्छा भोजन न खा पाने के अनके कारण हैं। इनमें सबसे प्रमुख है गरीबी। संसार के कुछ भागों में वहां की अधिकार धन-दौलत कुछ गिने-चुने लोगों के पास होती है। वे भोजन देने वाली फसलों की बजाय गन्ना व तम्बाकू उगाते हैं क्योंकि उनसे ज्यादा आमदनी होती है। गरीब लोग कर्जे लिए गए जमीन के छोटे से टुकड़े पर खेती करते हैं जबकि उस जमीन के मालिक फसल का एक बड़ा भाग हड़प जाते हैं।

 

 

गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों के स्वास्थ्य की बात करें तो उन परिवार की महिलाएं ही उज़की सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चाहे खाने के लिए कितना भी कम हो, महिलाओं को सबसे कम भोजन मिलता है । महिलाएं तभी भोजन करती हैं जब पुरुषों व बच्चों ने खा लिया हो अर्थात वे सबसे अन्त में खाती हैं और यही कारण हैं कि वे सिर्फ कमजोर ही नही बल्कि एनेमिक हो जाती है। इसलिए भुखमरी तथा कुपोषण की समस्या का तब तक कोई समाधान नहीं निकल सकता है जब तक जमीन व अन्य संसाधनों का न्यायपूर्वक वितरण नहीं होता है और महिलाओं को पुरुषों के बराबरी का दर्जा नहीं मिलता है।

 

 

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