औरंगाबाद

माइनस दस डिग्री पर खुले आसमान के नीचे गुजरना पड़ा 24 घण्टा, औरंगाबाद की बेटी ने बयां किया यूक्रेन का दर्द

औरंगाबाद। सोमवार को ब्लॉक कॉलोनी स्थित प्रोपर्टी डीलर धर्मेंद्र कुमार सिंह के घर वालों के खुशियों का ठिकाना नही था क्योंकि उनकी बेटी आर्या प्रकाश आज यूक्रेन से वापस अपने घर आई थी।माता पिता ने अपनी बेटी के आने पर न सिर्फ उसका भव्य स्वागत किया बल्कि गले लगाकर अपनी खुशियों का इजहार किया।

 

औरंगाबाद पहुंचने पर आर्या ने बताया कि जिस वक्त सरकार के द्वारा भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी किया गया था उस वक्त कॉलेज प्रशासन द्वारा यह जानकारी दी गयी थी कि मेडिकल के तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को भारत जाने की जरूरत नही है।लेकिन 24 फरवरी को जब कीव में बड़ा धमाका हुआ तो सबके हिम्मत पस्त हो गए। क्योंकि मिलिट्री की गाड़ियों के सायरन से पूरा इलाका गूंज उठा और सभी अपने खाने पीने के सामानों के साथ बंकर में आकर शरण ले लिए।चार दिनों तक ऐसा ही चला।कई रात आंखों ही आंखों में कट गए।दहशत और भय से दिमाग के सोचने की क्षमता समाप्त हो चुकी थी।

 

सभी छात्र छात्रा अपने अपने घर वापसी को बेताब हो गए।लेकिन रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचना आसान नही था।रोमानिया बॉर्डर की दूरी कॉलेज से लगभग 700 किलोमीटर थी।बस से सभी 28 फरवरी को रोमानिया सीमा तक पहुंचे लेकिन वहां से 6 से 7 किलोमीटर की दूरी भारी लगेज के साथ तय करनी पड़ी।24 घण्टे के अथक परिश्रम के बाद रोमानिया पहुंची।इस दौरान माइनस दस डिग्री सेल्सियस में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर होना पड़ा जो काफी कष्टदायक था।आर्या ने बताया कि रोमानिया आने के बाद सारे कष्ट दूर हो गए।यह 3 मार्च को दिल्ली की फ्लाइट मिली और सभी 4 को दिल्ली पहुंच गए।

 

आर्या ने भारत सुरक्षित लाने के लिये प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया है और यूक्रेन में फंसे अन्य छात्रों को भी शीघ्र लाने की अपील की है।इधर आर्या की मां प्रियंका कुमारी जो जनकोप में शिक्षिका है ने बताया कि जब यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत हुई तो दिल बैठ गया।किसी काम मे मन नही लगता था।दिन और रात कैसे कटते थे समझ मे नही आता था।बेटी से बात कर तसल्ली जरूर होती थी लेकिन एक आशंका मन को कमजोर करती जा रही थी।आज जब बेटी को देख तो खुशी हुई।उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि यही कोई व्यवस्था करे कि अब बच्चों को बाहर न जाना पड़े।

 

इसे भी पढ़ें

Back to top button

You cannot copy content of this page