औरंगाबाद

तो क्या भाजपा के नाव पर सवार होकर दिलीप सिंह करेंगे एमएलसी चुनाव की वैतरणी पार

औरंगाबाद। एक कहावत बहुत प्रचलित है कि “Every thing is right love and war ” लेकिन इस कहावत में एक शब्द पॉलिटिक्स भी जुट गया है।क्योंकि ऐसा देखने को मिल भी रहा है।कल तक एक दूसरे को गलियाने वाले लोग अब गलबहियां करते दिख जाते है।

 

ऐसी ही एक राजनीतिक परिदृश्य औरंगाबाद के विधान परिषद चुनाव को लेकर सामने आई है जहां राजद से नाता तोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दिलीप सिंह अब भाजपा समर्थित उम्मीदवार होंगे और यह पुष्टि भी हो चुकी है कि मंगलवार को दिलीप सिंह भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।हालांकि दिलीप सिंह के खेमे से ऐसी किसी भी सूचना को किसी के साथ साझा नही किया जा रहा है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की तरफ से दिलीप सिंह को भाजपा में शामिल होना सौ प्रतिशत सत्य माना जा रहा है।

 

हालांकि दिलीप सिंह को बीजेपी में जाने की जरूरत क्यों पड़ी जबकि उनके समर्थक इनकी जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त थे।emaatimes ने दो माह पूर्व ही दिलीप सिंह को भारतीय जनता पार्टी में जाने की बात कह चुका था।लेकिन उनके समर्थकों द्वारा इसे भूतों न भविष्यति कहकर खारिज कर दिया जा रहा था और आज वह बात सत्य ही गयी। राजनीतिक जानकार दिलीप सिंह को भाजपा में शामिल होने के पीछे लालू यादव की सजा मान रहे है और इसकी शुरुआत उसी वक्त हो गयी थी जब लालू यादव को दोषी करार दिया गया था और उसको लेकर सहानुभूति वोट उधर खिसकने लगी थी।

 

अनुमान यहां तक लगाए जाने लगे कि लालू यादव की सजा राजद उम्मीदवारों के लिए वरदान साबित होगी और इसकी भुनभुनाहट औरंगाबाद के कई वर्गों की बैठकों में सुनाई भी देने लगी थी।क्योंकि माई समीकरण हर हाल में एमएलसी के चुनाव में राजद उम्मीदवार की तरफ था और यही समीकरण दबे कुचले एवं वंचितों को एकजुट करने में लगा हुआ था।

 

गौरतलब है कि एमएलसी चुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवार घोषित नही थे उसके बाद भी जीत के दावे किए जा रहे थे।अब देखना यह लाजिमी होगा कि यदि दिलीप सिंह भाजपा उम्मीदवार होकर चुनाव में उतरते है तो उनका वोट बैंक रहेगा या बिखर जाएगा। क्योंकि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इन्हें हर वर्ग का वोट था लेकिन अब उनके नए रूप को कितने वोटर पच पाएंगे यह भविष्य के गर्त में है।

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