औरंगाबाद

शराब सेवन के आरोप में देव सब स्टेशन के प्रधान सहायक गए जेल, लेकिन सवाल वही कि आखिर क्यों नही बन्द हो रही है शराब

औरंगाबाद।भले ही सूबे के मुखिया नीतीश कुमार बिहार में शराबबंदी का ऐलान कर रखा हो लेकिन उनके ही कर्मी जो प्रायः वर्ष में कम से कम 2 बार शराब न पीने और इसके उपयोग को रोकने के लिए सार्वजनिक रूप से शपथ लेते हैं वही शराब सेवन के आरोप में पकड़े जा रहे हैं। जो पकड़े जा रहे हैं वह जेल की सलाखों के पीछे हैं। लेकिन जो पकड़े नहीं जा रहे हैं वह पाक साफ होकर शराब सेवन के नए-नए जुगाड़ में लगे हुए हैं।

 

मंगलवार को देव प्रखंड मुख्यालय स्थित पावर सब स्टेशन में कार्यरत प्रधान सहायक अरवल जिले के कलेर निवासी हरेंद्र कुमार सिंह शराब के नशे में हंगामा करते पकड़े गए और उन्हें जेल भेज दिया गया। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि आखिर जब वर्ष 2016 में ही शराबबंदी की घोषणा हो चुकी थी तो फिर कर्मी की नैतिकता में परिवर्तन क्यों नहीं हुआ। शराबबंदी पर 6 वर्षों में कितनी बार उनके द्वारा अपने अधिकारियों कर्मियों के साथ शराब सेवन न करने की शपथ भी ली गई होगी। तो इतने दिनों के बाद भी उनका जमीर कैसे नहीं जगा कि वह खुद को इस सामाजिक कुरीति से अलग कर ले।

 

यह स्थिति सिर्फ विद्युत विभाग में ही नहीं बल्कि सभी विभागों की है। हर विभाग में ऐसे कुछ लोग हैं जो शराबबंदी का मखौल उड़ा रहे लेकिन पकड़ में नहीं आ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की माने तो वैसे लोग जो शराब के आदि हैं उन्होंने शराब का सेवन करना नही छोड़ा है।क्योंकि उन्हें अब बाजार जाने की जरूरत नही खुद शराब का बाजार उनके घर पर हाजिर हो जा रहा है।

 

सच्चाई यही है कि वैसे लोग जो जो इसके आदि है उन्होंने आज तक शराब नही छोड़ी है और न छोड़ने वाले हैं। लोगों का मानना है कि जिले में जितनी भी शादियां या किसी भी प्रकार के समारोह हो रहे हैं। शराब सेवन करने से लोग परहेज नहीं करते। लोग जान कर भी अंजान बने रहते हैं और इसकी सूचना पुलिस को इसलिए नहीं देते।क्योंकि पुलिसिया लफड़े में कोई पड़ना नही चाहता।

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