औरंगाबाद

जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकार्ड 2344 वादों का हुआ निस्तारण, दो बंदी भी हुए रिहा

औरंगाबाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद के तत्वावधान में शनिवार को औरंगाबाद एवं दाउदनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत के दौरान औरंगाबाद में 9 एवं दाउदनगर में 3 न्यायिक बेंचों में सुलहनीय वादो की सुनवाई की गई। औरंगाबाद में रिकार्ड 2344 मामलों का निष्तारण किया गया।

जिला जज ने किया लोक अदालत का उद्घाटन

इसके पूर्व जिला जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला प्राधिकार के अध्यक्ष मनोज कुमार तिवारी, अपर जिला सत्र न्यायाधीश सुनील दत्त पांडेय, आनंदिता सिंह दिनेश कुमार प्रधान एवं प्राधिकार के सचिव प्रणव शंकर ने प्राधिकार सभागार में संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में न्यायिक पदाधिकारीगण, अधिवक्तागण तथा अन्य विभाग के पदाधिकारीगण उपस्थित रहें। उद्घाटन समारोह का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी सुदीप पांडेय ने किया जबकि आगतो का स्वागत प्राधिकार के सचिव प्रणव शंकर ने किया।

कोरोना के बाद पहली बार फिजिकल रूप से हुआ लोक अदालत का आयोजन

स्वागत संबोधन में श्री शंकर ने कहा कि कोरोना के बाद यह राष्ट्रीय लोक अदालत पूर्ण रूप से भौतिक रूप से आयोजित किया जा रहा है। इसका फायदा उठाने अधिक से अधिक लोग यहां आये है। कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने को लेकर आम लोगो को जागरूक करने में यहां की मीडिया की भूमिका बेहद सराहनीय रही है। इसी का असर है कि राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन की जानकारी मीडिया के माध्यम से हर घर तक पंहुची और आज यहां लोग स्वत: आकर अपने वाद का निस्तारण करवाने में रूचि ले रहे है। वही अध्यक्षीय संबोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने वादकारियों से कहा कि आप यहां इसलिए आये हैं कि आपके वादों का हरसंभव समझौता के आधार पर निस्तारण हो सके। उन्होने राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलो को निपटाने के फायदे बताते हुए कहा कि सरकारी हो या निजी अस्पताल, दोनो ही जगह आउटडोर होता है। जैसे अस्पताल के आउटडोर में आये मरीज का इलाज होता है, उसी तरह राष्ट्रीय लोक अदालत भी अपना काम करता है। यहां पक्षकारों की परेशानियों का निदान हो जाता है।

 25 दिनों से चल रही थी लोक अदालत की तैयारी

उन्होंने संबंधित बेंच को यह निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति जो न्याय की उम्मीद से यहां आयें हैं उन्हें निराशा हाथ नहीं लगनी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान हो, यही राष्ट्रीय लोक अदालत का उदेश्य भी है। कहा कि विगत बीस पच्चीस दिनों से जो लोग इससे जुड़कर लगातार मेहनत कर रहे हैं, आज उनके परिश्रम के परिणाम का दिन है। जिला जज कहा कि प्राधिकार के सचिव और प्राधिकार से संबंधित लोगों द्वारा लगातार 20-25 दिनों से की जा रही तैयारी का ही परिणाम है कि अधिक से अधिक वादों के निष्पादन का उम्मीद बनी है। उन्होने ऋण वाद और मोटर दुर्घटना के मामलो में मानवीय दृष्टिकोण अपना कर वादों का निष्पादन करने का निर्देश दिया। कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी सुदीप पांडेय ने किया।

स्वास्थ्य जांच की सुविधा का भी मिला लाभ

इस बार के राष्ट्रीय लोक अदालत की मुख्य विशेषता यह रही कि लोक अदालत के साथ ही स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन विधिक सेवा सदन में किया गया। शिविर मे सुगर, बीपी, कैंसर, कोरोना जांच, कोरोना टीकाकरण, दवा वितरण आदि प्रमुख सुविधाओं से वादकारियों के साथ ही उपस्थित सभी लोगो ने लाभ उठाया। सभी न्यायिक पदाधिकारियों के स्वास्थ्य की जांच शिविर में की गई। स्वास्थ शिविर का संचालन सिविल सर्जन डॉ. कुमार वीरेंद्र प्रताप के नेतृत्व में डॉ. शरमद आलम, डॉ. हर्ष राज, डॉ. श्याम कुमार, डीपीसी नागेन्द्र केशरी, प्रबंधक मंटू कुमार के साथ ही स्वास्थ्यकर्मी प्रियंका कुमारी, अंजू प्रकाश, नेहा कुमारी, बबली कुमारी, राजकमल यादव एवं राजेश कुमार की टीम ने किया। शिविर में वादकारियों को अपने वादो के निष्पादन के साथ ही स्वास्थ्य जांच कराने का भी अवसर मिला।

कारा से मुक्त हुआ अर्जुन चौधरी व सोनू कुमार

लोक अदालत का फायदा आज उस वक्त देखने को मिला जब दो विभिन्न मामलो में कारा में बंद दो अभियुक्तों का वाद समाप्त हुआ और उन्हें कारा से मुक्ति मिली। इनमे नबीनगर थाना कांड संख्या-129/10 में कारा में बंद अर्जुन चौधरी तथा अम्बा थाना कांड संख्या-80 /2021 में बंद सोनू कुमार शामिल है। इनके वाद का निष्पादन किया गया। दोनो में एक बंदी मंडल कारा औरंगाबाद में बंद था और एक बंदी अनुमंडल कारा दाउदनगर में बंद था। दोनो को तत्काल वीडियो कांफ्रेंसिंग से राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थापित कराया गया और उनके वाद को समाप्त कर कारा से मुक्ति दिलाई गई। यह वाद बेंच संख्या 05 और 08 पर निष्पादित किया गया।

बना रिकॉर्ड, 2344 वादों का हुआ निस्तारण

वही राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से संबंधित 17 वादों में कुल 71 लाख रूपये का समझौता कराया गया। इस कार्य में सभी की भूमिका बेहद सराहनीय रही। पारिवारिक मामलो से संबंधित 03 वाद, घरेलू हिंसा के 02, आपराधिक सुलहनीय मामलें से संबंधित 246 वाद, अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय से संबंधित 443 वाद तथा बैंक ऋण से संबंधित 1631 मामलो का निस्तारण करते हुए कुल 6 करोड़ 78 लाख रूपये पक्षकारो को राहत देते हुए समझौता कराया गया। पूरे राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन को सफल बनाने में प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता अभिनन्दन कुमार, सुजीत कुमार, प्राधिकार के कर्मी सुनील कुमार सिंह, परशुराम कुमार सिंह, संजय कुमार, टेक्निकल स्टाफ सुनील कुमार सिन्हा, अर्पणा सहाय, सहयोगी के रूप में नवरतन कुमार, गीता कुमारी एवं कुंदन कुमार की भूमिका सराहनीय रही।

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