औरंगाबाद

मो गोरी को पराजित करने के बाद क्षमादान देना ही बना पृथ्वीराज चौहान के मौत का कारण-निखिल कुमार


औरंगाबाद। जिला मुख्यालय स्थित भरथौली रोड के समीप अवस्थित हवेली रिसोर्ट के प्रांगण में वीर शिरोमणि, सनातन के रक्षक पृथ्वीराज चौहान जी की पुण्यतिथि धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामानुज पांडेय ने किया ।आगत अतिथियों ने पृथ्वीराज चौहान के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया ।तत्पश्चात मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार, विशिष्ट अतिथि डॉ अजय कुमार सिंह, पूर्व विधान पार्षद राम उपदेश सिंह ,पूर्व आईएएस अधिकारी, डॉ सुरेंद्र नारायण सिंह पूर्व प्राचार्य महाराजा कॉलेज आरा, ट्रस्ट के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ,प्रोफ़ेसर विजय कुमार सिंह, डॉक्टर संजीव रंजन ,नवीनगर के विधायक माननीय विजय कुमार सिंह एवं अन्य ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी का उद्घाटन किया।

 

 

पृथ्वीराज चौहान के जीवन चर्या व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर परिचर्चा नई पीढ़ी के लिए विषयक विचार गोष्ठी पर उद्बोधन देते हुए उपस्थित वक्ताओं ने उन्हें इतिहास पुरुष बताया। डॉक्टर सुनील बोस ने पृथ्वीराज के व्यक्तित्व को कालजई एवं वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह ने पृथ्वीराज चौहान के समकालीन इतिहास से सबक लेने की बात कही। पूर्व प्राचार्य डॉक्टर सुरेंद्र नारायण सिंह ने पृथ्वीराज के व्यक्तित्व को क्रांतिकारी एवं युगांतरकारी बताया। उनके व्यक्तित्व में वीरता पूर्ण श्रृगारिकता की छवि उत्कृष्ट होती है ।पूर्व आईएएस अधिकारी राम उपदेश सिंह ने पृथ्वीराज चौहान के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपना सारा जीवन भारत मां की रक्षा के लिए न्योछावर कर दिया। साथ ही साथ अपनी काव्यात्मक भाषा में उनके वीरगाथा को उद्धृत करते हुए उनके जीवन वृत्त की चर्चा की ।

 

पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह ने पृथ्वीराज चौहान को युगपुरुष बताया।वही आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष रामानुज पांडेय ने अध्यक्षीय उद्बोधन में पृथ्वीराज चौहान के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके कदम से कदम मिला कर चलने में चंद्रवरदाई ने प्रमुख भूमिका निभाई थी और पृथ्वीराज चौहान के साथ ही उन्होंने अपनी शहादत दी थी ।

 

मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान का व्यक्तित्व कृतित्व भारत के इतिहास की स्वर्णिम कड़ी है उनके समकालीन जितने भी राजा हुए उन सब में पृथ्वीराज ने अपने त्याग और बलिदान से भारत के अस्मिता की रक्षा की। उनके साथ समकालीन परिवेश की ऐतिहासिक एवं राजनीतिक तथ्यों ने जो भी परिस्थिति उत्पन्न किया उसमें पृथ्वीराज चौहान ने विषम परिस्थिति में भी अपनी वीरता के बल पर मोहम्मद गोरी को पराजित किया और उसे क्षमा किया और वापस लौट जाने को कहा।

 

परंतु यही उनकी सबसे बड़ी भूल थी। उसके बाद छद्म तरीके से गोरी ने पृथ्वीराज को बन्दी बना लिया और गर्म सलाखों से दोनों आंखे दाग दी। लेकिन चंदरबरदाई की सूझ बूझ से पृथ्वीराज मो. गोरी को मारने में सफल हुए।गोरी की मौत के बाद मची अफरा तफरी में भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए चंदरबरदाई एवं पृथ्वीराज चौहान ने मौत को गले लगा लिया।इस घटना के बाद चौहान की पत्नी संयोगिता ने जोहर कर लिया।आज की वर्तमान परिस्थिति में भारत का लोकतंत्र को मजबूत बनाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभकारों को दरकिनार किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है।

 

आज के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ज्योतिष शिव नारायण सिंह, जगदीश सिंह, अनिल कुमार सिंह, सूर्यसिंह, राजेंद्र सिंह, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, मृत्युंजय सिंह, डॉ अरविंद शर्मा, राशिद अली खान, पप्पू सिंह, श्याम बिहारी सिंह, राजेश्वर सिंह, संतन सिंह, अमित कुमार, सुनील सिंह, सुरेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, रविशंकर सिंह, राजेश सिंह पप्पू, रामभजन सिंह, विकास सिंह ,जयंत प्रकाश, चंदन सिंह चौहान, बबलू कुमार सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

इसे भी पढ़ें

Back to top button

You cannot copy content of this page