औरंगाबाद

इतवारी खास- पांच राज्यों का चुनाव परिणाम और भाजपा का फीलगुड

राकेश कुमार(लेखक-लोकराज के लोकनायक)

इतवारी खास। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आ गये हैं। जनादेश का सम्मान सभी ने किया और करना भी चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में जनता मालिक है और जनता स्वयं के लिए, स्वयं के मतदान द्वारा सरकार चुनती है। सभी राज्यों में स्पष्ट जनादेश और जनादेश के बढ़े प्रतिशत ने हार का ठिकरा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन(ईवीएम) पर फोड़ने की परंपरा को विराम लगाने वाला साबित होगा यह चुनाव।

 

उत्तर प्रदेश को लोकलुभावन वादे और महज कल्पना की कागजी धरातल पर उत्तम प्रदेश घोषित करने वाली समाजवादी पार्टी को जनादेश ने सत्ता से फिर एक बार बेदखल कर दिया है। यहाँ भाजपा को प्रचंड बहुमत मिली है यद्यपि पिछले चुनाव से सीटें थोड़ी कम आईं हैं किन्तु पक्ष में मतदान प्रतिशत बढ़ा है।

 

कुशासन से मुक्ति, कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार, दीर्घकालीन हितकारी योजनाएं, मोदी-योगी का साफ व बेदाग चेहरा का समीकरण(एमवाई समीकरण) और बाबा का गुंडों के खिलाफ बुलडोजर वाली त्वरित कार्रवाई ने जनता का दिल जीत लिया।

 

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अखिलेश राज में गुंडई औऱ दबंगई से त्रस्त जनता ने सपा को सत्ता में आने से रोका जो ठीक वैसे ही है जैसे बिहार में लालू राज में विधि व्यवस्था की समस्या से तंग और त्रस्त लोग मतदान के समय नीतीश कुमार और उनके साथी दल भाजपा के लिए सत्ता विरोधी लहर के बावजूद गोलबंद हो जाते है।

 

भाजपा की जीत का एक बहुत बड़ा कारण सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पुनर्स्थापना में राष्ट्रीय स्वयं सेवक की दीर्घकालीन नीतियां और पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा इस दिशा में त्वरित पहल भी प्रमुख है। इन नीतियों व सरकार के स्तर पर की गई पहल की जानकारी को जनता के सामने तर्क व स्पष्टता के साथ रखकर विश्वास जीतने और जनमत बनाने में में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं यथा- राकेश सिंहा और सुधांशु त्रिवेदी जैसे लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

 

कांग्रेस के काल में छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बहुसंख्यकों की सांस्कृतिक और धार्मिक पक्षों को दमित किया जाना और एकमुश्त अल्पसंख्यक मतों की चाहत में बहुसंख्यक की सांस्कृतिक व धार्मिक अस्मिता को हाशिये पर धकेलने की नीति का खामियाजा कांग्रेस को लोकतांत्रिक चुनावों में भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस का सफाया इसके संकेत हैं।

 

भाजपा की मोदी सरकार द्वारा लोकलुभावन और तात्कालिक समस्याओं के अल्पकालिक समाधान की जगह दीर्घकालिक समाधान खोजने की ईच्छा शक्ति को भी जनता जनादेश में मुहर लगाती दिख रही है।
आजादी के समय जनित कश्मीर की समस्या का समाधान पचहतर सालों के बाद मोदी सरकार द्वारा किया जाना, अयोध्या के श्री राम मंदिर जैसे विवादित और कभी भी धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाले मसले का स्थायी समाधान ढ़ूंढे जाने जैसे पहलों ने मोदी सरकार के प्रति लोगों में विश्वसनीयता को बढ़ाया है।

 

इसके अलावा तीन तलाक जैसे सामाजिक समस्याओं का कानूनी समाधान खोजे जाने की मोदी सरकार की पहल ने न केवल मुस्लिम महिलाओं का विश्वास जीता है बल्कि भारत की आधी आबादी का पूरा विश्वास जीता है। इन मुद्दों पर कांग्रेस सरकार की वोट बैंक वाली राजनीतिक चश्मे से जनता परेशान हो चुकी थी किन्तु मोदी सरकार द्वारा इन मुद्दों का वोट बैंक की तत्कालीन राजनीति को दरकिनार कर दीर्घकालिक समाधान खोजने की पहल ने सरकार को जनप्रिय बनाने का काम किया है।

 

भाजपा के प्रखर प्रवक्ताओं द्वारा सरकार और देश के मुद्दों का पक्ष तार्किक तरीके व स्पष्टता के साथ रखे जाने की काबिलियत ने सरकार की नीतियों और नियत को जनता को सरल तरीके से समझने में मददगार बना है जो जनता के विश्वास जीतने में अहम भूमिका निभाने वाली है। देश के अन्य राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं को इनसे सीखने की जरूरत है।
चुनाव में प्रबंधन की कुशलता और जनता से सीधा संवाद भी जनता के बीच विश्वसनीयता को बढ़ाने वाला कदम होता है। चाहे योगी आदित्य नाथ द्वारा कोरोना काल में सीधे लोगों तक पहुँचकर दी गई सेवा हो या मोदी द्वारा मन की बात समेत समय-समय पर जनसंवाद स्थापित किया जाना लोगों के बीच उपस्थिति जैसा अहसास होता है।

 

पंजाब में आम आदमी पार्टी द्वारा तकरीबन अस्सी फीसदी सीटों पर जीत का मुख्य वजह आप द्वारा चुनाव का कुशल प्रबंधन, लोगों के मुद्दों को प्रखरता से लगातार उठाया जाना, लोगों के बीच विगत पांच सालों से आप के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और दिल्ली में आप की सरकार द्वारा स्वच्छ शासन का अक्स पंजाबी समुदाय द्वारा पंजाब में संजोये जाना, अकाली दल की वंशवादी व नाकाम राजनीति, कांग्रेस में सिद्धू-कैप्टन विवाद और चन्नी का खोंटा राजनीतिक चवन्नी मुख्य रूप से जिम्मेवार रहा। विगत साल दिल्ली में दिल्ली परिवहन निगम की बसों पर मार्शल की तैनाती और मुफ्त में महिलाओं की यात्रा को देखने के बाद मुझे समझ में आया था कि इस पहल से केजरीवाल सरकार ने रोजगार की पहल के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा को चाक-चौबंद कर आधी आबादी को साधने का काम किया है।

 

पूर्वोत्तर की राज्यों के साथ केन्द्र सरकार द्वारा दुराव की जगह जुड़ाव की पहल ने पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा की उपस्थिति जबरदस्त तरीके से दर्ज कराया गया है। पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ भाजपा की जुड़ाव और लगाव को बिहार निवासी भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिंहा द्वारा मेघालय के कोंगथोंग गाँव को गोद लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान दिलाने को सहज रूप में महसूस किया जा सकता है।

 

उत्तराखंड में भाजपा की पुनर्वापसी किन्तु मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की पराजय केवल मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व व देश व्यापी स्वीकार्यता को स्थापित करता है।गोवा में भाजपा की सरकार बनना मनोहर परिकर की स्वच्छ छवि वाली भाजपा प्रशासन और पीएम मोदी के प्रति जनविश्वास का प्रतिफल है।

 

देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, रोजगार सृजन की दिशा में व्यापक पहल और युवाओं के विश्वास जीतना मोदी सरकार के समक्ष अभी भी बहुत बड़ी चुनौती है। अगर इन मुद्दों की ओर भाजपा सरकार के द्वारा ध्यान नहीं दिया जाएगा तो भविष्य ‘फील गुड फैक्टर का गुब्बारा’ कभी फूट सकता है।

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