औरंगाबाद

एमएलसी चुनाव में नामों के घालमेल में कही उलझ न जाएं मतदाता, काफी सूझबूझ के साथ करना होगा मतदान

औरंगाबाद।एमएलसी चुनाव में मतदान के दिन कहीं अपने प्रत्याशी की जगह दूसरे को फायदा पहुंचाकर न चले आए मतदाता। ऐसा ही कुछ इस बार के एमएलसी चुनाव में लोगों को देखने को मिलेगा क्योंकि मत पत्र में मतदाताओं को एक ही नाम के एक से अधिक उम्मीदवार बैलेट पेपर पर दिखेंगे।ऐसी स्थिति में मतदाताओं को काफी सजग और सूझबूझ के साथ मतदान करना होगा। गौरतलब है कि बिहार में 24 सीटों के लिए हो रहे एमएलसी चुनाव का मतदान 4 अप्रैल और मतगणना 7 अप्रैल को होना है। इसके लिए निर्वाचन विभाग ने अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली है। औरंगाबाद में गुरुवार को हुए स्क्रूटनी के बाद इस चुनाव में तीन दलीय एवं पांच निर्दलीय उम्मीदवार सामने हैं।

 

हालांकि इस संबंध में उप निर्वाचन पदाधिकारी जावेद इकबाल ने बताया है कि 21 मार्च को नाम वापसी के बाद ही तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी कि चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या आठ रहेगी या इससे कम। इस चुनाव के लिए 8 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र भरा है और सभी आठ उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए हैं। ऐसी स्थिति में फिलहाल 8 प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में है।

 

स्क्रूटनी के बाद उम्मीदवारों के नामों से यह स्पष्ट हुआ कि मतदान के दिन मतदाताओं में दिग्भम्रित होने की स्थिति बनी रहेगी क्योंकि दो राजनीतिक दलों के प्रत्याशी के नाम के दो दो प्रत्याशियों ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र भरा है। राजनीतिक दलों की तरफ से राजद ने अनुज कुमार सिंह, लोजपा ने अनूप ठाकुर एवं एनडीए ने दिलीप कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस पार्टी से एमएलसी चुनाव में समर्थन मांगे जाने के बाद समर्थन नहीं मिलने पर कांग्रेस के ही वरीय नेता डॉ अक्षय लाल पासवान ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में अपनी उम्मीदवारी दर्ज की है।

 

इसके अतिरिक्त 2-2 प्रत्याशी ऐसे हैं जो राजद और भाजपा के उम्मीदवारों के नाम के हैं.निर्दलीय उम्मीदवारों में दशवतखाप मदनपुर के अनुज कुमार सिंह, सदर प्रखंड बेली के अनुज कुमार सिंह एवं चतरा सिलाढ़ के दिलीप कुमार सिंह तथा बारुण नकाईन के दिलीप कुमार सिंह शामिल है। इस प्रकार एमएलसी चुनाव में एक ही नाम के तीन तीन प्रत्याशी चुनावी मैदान में है और बैलट पेपर में उनके नाम भी दिखेंगे। ये निर्दलीय प्रत्याशी किस दलीय उम्मीदवारों को नुकसान पहुचाएंगे यह तो भविष्य के गर्त में है।

 

लेकिन मतदान के दिन मतदाताओं को दिग्भ्रमित करने के लिए इनके नाम काफी हैं।ऐसे में जब सिंबल प्राप्त हो जाएंगे तब दलीय प्रत्याशी अपने चुनाव चिन्ह और क्रम संख्या पर ज्यादा फोकस करेंगे। ताकि नाम के चक्कर में मतदाता कहीं उलझ न जाएं और अपने प्रत्याशी की जगह कही उसी नाम के दूसरे प्रत्याशी को अपना मत न देकर चले आएं।

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