औरंगाबाद

शहीद भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव की तस्वीरें संसद भवन में लगाने की हुई मांग

औरंगाबाद। बुधवार को दाऊदनगर में शहीद-ए-आजम भगत सिंह सामाजिक विकास संस्थान,बिहार के तत्वावधान में शहीद भगत सिंह एवं उनके साथ शहीद हुए उनके दो साथियों- राजगुरु एवं सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई । इस अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा भी की गई जिसमें शहर के गणमान्य लोगों,विभिन्न सामाजिक राजनीतिक संगठनों के लोगों के साथ-साथ अच्छी-खासी संख्या में छात्र-छात्राएं भी सम्मिलित हुईं ।

सभा को संबोधित करते हुए संस्थान के सचिव सत्येन्द्र कुमार ने कहा कि शहीद-ए-आजम के विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही बनी हुई है जितनी आज से लगभग नब्बे वर्षों पूर्व थी क्योंकि आज भी उनके सपने अधूरे हैं । आज उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रयास करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।

 

इसके पूर्व सभा को संबोधित करते हुए संस्थान के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद चंद्रवंशी ने आगत अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा कल 24 मार्च 2022 से लेकर 07 अप्रैल 2022 तक शहादत पखवाड़ा मनाने की घोषणा की जिसके अंतर्गत सभी मुहल्लों में उक्त तीनों शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ ‘शहीद-चर्चा’ भी की जाएगी ।

 

इस कार्यक्रम में आमंत्रित संस्थान के विशिष्ट अतिथि तथा शहर के प्रसिद्ध पैथोलॉजिस्ट मो फजलुर्रहमान उर्फ लड्डू जी ने कहा कि भावी नस्लों को शहीदों के विचारों से बड़े पैमाने पर परिचित कराना बहुत जरूरी है क्योंकि आज देश में सांप्रदायिक और कॉरपोरेट गठबंधन के द्वारा देश की बेशकीमती संपतियों की देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हाथों बेचने की प्रक्रिया काफी तेज गति से आगे बढ़ाई जा रही है ।

सभा को संबोधित करते हुए संस्थान के संयुक्त सचिव राजकमल कुमार सिंह ने कहा कि भगत सिंह आजादी की लड़ाई के वह प्रकाश स्तंभ हैं जिनकी रौशनी में देश के आदर्शवादी नौजवान आज भी भावी समाजवादी राष्ट्र बनाने के सपने देख रहे हैं ।

 

सभा को संबोधित करते हुए संस्थान के उपाध्यक्ष मो सब्बीर अहमद ने कहा कि भगत सिंह सिर्फ एक जोशीला क्रांतिकारी योद्धा ही नहीं थे बल्कि एक उच्च कोटि के विचारक और भविष्यदृष्टा भी थे जिन्होंने एक सचमुच के आजाद और खुशहाल भारत का सपना देखा था । संस्थान के कोषाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने इनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उपस्थित लोगों का आह्वान किया कि सभी लोग भगत सिंह की रचनाओं का गंभीरतापूर्वक अध्ययन करें और जहां भी रहें उनके विचारों से लोगों को अवगत कराएं ।

उक्त वक्ताओं के अलावा इस सभा को संस्थान के कार्यकारिणी सदस्य सुरेन्द्र सिंह,मीना सिंह,प्रह्लाद प्रसाद, अवधेश कुमार शिक्षक,महाफुज आरिफ, नरसिंह चौहान, रामचंद्र चौहान, चनार्दन चौधरी,बिरजू चौधरी,अरविंदो मिशन स्कूल की प्राचार्या सुषमा सिंन्हा, शिक्षिका सिंपी सिन्हा,नजराना खातून, रूही प्रवीन,ताजुद्दीन अंसारी,रूपेश कुमार,इत्यादि गणमान्य लोगों ने भी सभा को संबोधित किया ।सभा में शहर के स्थानीय आम नागरिकों के अलावा काफी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थीं ।

इस कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सर्वसम्मति से निम्नलिखित ‘संकल्प एवं मांग प्रस्ताव’ पारित किए

(01) यह श्रद्धांजलि सभा आज इस संकल्प को पुनः दुहराती है कि शहीद-ए-आजम के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा शहीदों के सपनों का नया समाजवादी राष्ट्र बनाने के लिए सभी उपस्थित लोग अपनी ऊर्जा का एक-एक कण लगा देंगे ।

(02) यह श्रद्धांजलि सभा एक बार फिर से यह संकल्प दुहराती है कि दाउदनगर-नसरीगंज सोन पुल का नामकरण “शहीद भगत सिंह सेतु” करने के लिए अपना धारावाहिक संघर्ष जारी रखेगी । इसके साथ ही सोन-पुल और बारुण रोड के मिलन बिन्दु पर स्थित चौराहे पर शहीद-ए-आजम सहित तीनों शहीदों की अदमकद प्रतिमाएं लगाइ जाएंगी ।

(03) यह श्रद्धांजलि सभा भारत सरकार से यह मांग करती है कि वह शहीद-ए-आजम समेत उनके साथ शहीद हुए राजगुरु एवं सुखदेव की तस्वीरें संसद भवन में लगाए ।

(04) यह श्रद्धांजलि सभा पंजाब सरकार समेत सभी राज्य सरकारों से यह मांग करती है कि वे उक्त तीनों शहीदों की तस्वीरें अपनी-अपनी विधान सभाओं में भी लगवाएं ।

(05) यह श्रद्धांजलि सभा भारत सरकार एवं सभी राज्य सरकारों से यह मांग करती है कि वे शहीद-ए-आजम के शहादत दिवस पर 23 मार्च को आधिकारिक रूप से “शहीद-ए-आजम दिवस” घोषित करें तथा इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी घोषित करें ताकि सभी लोग अपने-अपने ढंग से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें ।

(06) यह श्रद्धांजलि सभा यह मांग करती है कि केन्द्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारें शहीद-ए-आजम के नाम पर दिल्ली सहित सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में शहीद-ए-आजम के नाम पर कम से कम एक-एक पुस्तकालयों का निर्माण करवाएं जिनमें अनिवार्य तौर पर उक्त शहीदों के जीवन और विचारों से संबंधित सभी तरह की पुस्तकें उपलब्ध हों ।

(07) यह श्रद्धांजलि सभा यह मांग करती है कि केन्द्र सरकार सहित सभी राज्य सरकारें शहीद-ए-आजम की सभी प्रकाशित एवं अप्रकाशित रचनाओं का मुद्रण एवं प्रकाशन अपने खर्च पर करवाएं तथा देश के सभी पुस्तकालयों को मुफ्त में उपलब्ध करवाएं ।

(08) यह संकल्प सभा केन्द्र एवं राज्य के सरकारों से यह मांग करती है कि वे शहीद-ए-आजम के जीवन एवं विचारों को स्कूल-कॉलेज के सभी स्तर के पाठ्यक्रमों में शामिल करें ताकि छात्र-नौजवान बचपन से ही शहीद-ए-आजम के जीवन और विचारों से परिचित हो सकें। अन्त में “इंकलाब जिंदाबाद!” एवं “शहीदों का सपना पूरा हम करेंगे !” जैसे गगनभेदी नारों के साथ ही सभा समाप्ति की घोषणा की गई ।

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