औरंगाबाद

कायस्थों के प्रति उदासीन रवैये को समाप्त करने के लिए कालबद्ध कार्यक्रम चलायेगा जीकेसी : राजीव रंजन

अगले वर्ष नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कायस्थों का राजनीति में हिस्सेदारी कार्यक्रम

देश के सभी राज्यों में हो रहा जीकेसी का विस्तार : राजीव रंजन

राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में संगठन को मजबूत और धारदार बनाने पर जोर : अनुराग सक्सेना

जीकेसी में तेजी से बढ़ रही कायस्थ महिलाओं की भागीदारी : रागिनी रंजन

नई दिल्ली। ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस विभिन्न राजनीतिक दलों के कायस्थों के प्रति उदासीनता के भाव को तोड़ने के लिए कालबद्ध कार्यक्रम चलाएगा और इस सिलसिले में अगले वर्ष नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कायस्थों की राजनीतिक भागीदारी मुद्दे को लेकर बड़ा कार्यक्रम आयोजित करेगा ।यह निर्णय आज नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में जीकेसी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में लिया गया ।बैठक की अध्यक्षता करते हुए जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि शैक्षणिक , सांस्कृतिक , बौद्धिक और तकनीकी रूप से मजबूत कायस्थ जाति के हितों तथा उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है और इस ओर उदासीनता का भाव है ।

 

कायस्थों को नजरअंदाज किए जाने के मुद्दे को लेकर शीघ्र ही कालबद्ध अभियान की घोषणा की जायेगी। उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज की मशाल वाहक जाति है और समाज के सभी वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलती है लेकिन आज इनके हितों तथा महत्वपूर्ण भागीदारी की उपेक्षा करना समाज और राष्ट्रहित के लिए नुकसानदेह है।

 

श्री प्रसाद ने कहा कि अगले वर्ष नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कायस्थों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर होने वाले महाकुंभ में विभिन्न प्रांतों से एक लाख से अधिक लोगों की भागीदारी होगी । इसके लिए तैयारी अभी से ही शुरू कर दी जाएगी ।उन्होंने कहा कि जीकेसी का देश के उन कुछ राज्यों में भी विस्तार हो रहा है जहां हम अपना संगठन खड़ा नहीं कर पाए थे ।

 

आज आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के लिए प्रदेश संयोजकों का मनोनयन किया जा रहा है ।इसके साथ ही ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस का देश के 20 से अधिक राज्यों में गठन हो चुका है और शीघ्र ही अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में भी संगठन की घोषणा कर दी जाएगी ।

 

ग्लोबल अध्यक्ष ने कहा कि कायस्थों के राजनीतिक हित को नजरअंदाज किए जाने और विभिन्न राजनीतिक दलों के उदासीन रवैया को लेकर देश की इस सबसे बुद्धिजीवी जाति खासकर खासकर युवाओं में उबाल है । जीकेसी इन्हीं मुद्दों को लेकर सामने आ रहा है । इससे देश के विभिन्न हिस्सों से हमें व्यापक समर्थन मिला है और बड़ी संख्या में लोग जीकेसी को समर्थन एवं सहयोग कर रहे हैं ।

 

जीकेसी की प्रबंध न्यासी श्रीमती रागिनी रंजन ने कहा कि हम विश्व कायस्थ महासम्मेलन के माध्यम से देशभर में बड़ी संख्या में फैले कायस्थ परिवारों को उनके राजनीतिक, आर्थिक शैक्षणिक और व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी बुलंद आवाज को सत्ता तथा राजनीति के गलियारे तक पहुंचाने के लिए एकजुट हुए हैं ।उन्होंने कहा कि जो कायस्थ हित की बात करेगा, जो कायस्थ हित का सम्मान करेगा , कायस्थ उसके साथ रहेगा ।

 

जीकेसी के ग्लोबल महासचिव अनुराग सक्सेना ने कहा कि जीकेसी पूरी दुनिया में कायस्थों का सबसे बड़ा संगठन बनकर उभरा है और देश के लगभग सभी राज्यों समेत 20 से अधिक देशों में इसका गठन हो चुका है । जीकेसी की ओर से शिक्षा , रोजगार, व्यापार, कला- संस्कृति , खेल, कृषि, पर्यावरण आदि के क्षेत्र में कायस्थ युवाओं तथा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निरन्तर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ।

 

आज यही कारण है कि जीकेसी अपने गठन के केवल एक साल के भीतर विश्व कायस्थ महासम्मेलन आयोजित करने में और सभी राज्यों से बड़ी संख्या में कायस्थों की भागीदारी सुनिश्चित करने में सफल हुआ है । उन्होंने कहा कि कायस्थों के समग्र हितों को ध्यान में रखते हुए जीकेसी निरंतर अभियान चलाते रहेगा और उन्हें उनके समुचित हक एवं अधिकार के सशक्तिकरण के लिए काम करेगा ।उन्होंने संगठन में महिलाओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि महिलाएं जब आगे आ जाएंगे तो कायस्थों का हर तरह से सशक्त होना सुनिश्चित हो सकेगा ।इस दिशा में महिला सेल के कार्यों की उन्होंने सराहना की ।

 

इस अवसर पर जीकेसी के ग्लोबल उपाध्यक्ष आनंद कुमार सिन्हा, जीकेसी दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार, जीकेसी बिहार की प्रदेश अध्यक्ष डा. नमता आनंद, जीकेसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कमल किशोर, मीडिया-कला संस्कृति प्रकोष्ट्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम कुमार, चित्रांश चैंबर्स ऑनऊ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के राष्टीय अध्यक्ष नवीन कुमार, कला संस्कृति प्रकोष्ठ की कार्यवहक अध्यक्ष श्रुति सिन्हा, कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव पवन सक्सेना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आलोक अवरिल, जीकेसी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव, कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक दीप श्रेष्ठ, पार्श्वगायिका प्रिया मल्लिक, सुबाला वर्मा, राजीव कांत,शुभ्रांशु श्रीवास्तव,शालिनी सिन्हा, नवीन श्रीवास्तव,रजनी श्रीवास्तव,अभय सिन्हा,हीरालाल कर्ण,नीतिन माथुर,दीपांशु श्रीवास्तव,सतीश श्रीवास्तव नरेन्द्र कुमार अम्बस्था, शिल्पी बहादुर अजय अमृतराज समेत कई गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये।

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