औरंगाबाद

शिक्षकों से जबरन करवाया जा रहा है पीएम पोषण योजना का संचालन – विजय

औरंगाबाद। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि मध्याह्न भोजन योजना जो केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही है, मैं उसका समर्थन करता हूं। क्योंकि यह बच्चों को पौष्टिक एवं पोषण देने वाली योजना है। लेकिन इस योजना का संचालन बिहार में वर्ष 2005 से ही जबरन शिक्षकों के माध्यम से कराया जा रहा है जो न्यायोचित नहीं है। योजना का संचालन शिक्षकों द्वारा कराए जाने का हमारा संगठन पुरजोर विरोध करता है।

वर्ष 2005 में ही इस विषय से संबंधित एक याचिका दायर की गई थी। जिसका वाद संख्या CWJC – 9487/ 05 है। जिसकी सुनवाई के बाद स्पष्ट रूप से कोर्ट द्वारा आदेश दिया गया था, कि इस योजना से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए। शिक्षक सिर्फ भोजन वितरण एवं भोजन की गुणवत्ता की जांच एवं अनुश्रवण करेंगे। पुनः अवर सचिव भारत सरकार एमडीएम ए फ संख्या – 17-2/ 2018 ई ई – 5(एम डी एम – 1-2) दिनांक 22 अक्टूबर 2018 एवं सहायक कार्यक्रम समन्वयक सह सूचना पदाधिकारी लोक सूचना पदाधिकारी मध्यान्ह भोजन योजना बिहार के पत्रांक 2513 दिनांक 28-10-2019 तथा सहायक कार्यक्रम समन्वयक लोक सूचना पदाधिकारी पीएम पोषण योजना बिहार पटना के पत्रांक मoभोoES-123/2021/76 दिनांक 17 जनवरी 2022 के द्वारा जारी पत्र में इस योजना को गैर शैक्षणिक बताया गया है तथा इसका संचालन प्रधानाध्यापकों/ शिक्षकों के द्वारा नहीं कराए जाने की बात कही गई है।

 

राज्य से जारी किसी भी पत्र में यह आदेश नहीं है कि विद्यालयों में इस योजना का संचालन प्रधानाध्यापकों के द्वारा कराया जाना है। सबसे बड़ी बात कि किसी भी विद्यालय में इस योजना को संचालन करने हेतु परिवर्तन मूल्य की राशि और अंडा फल की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है और ना ही जिस खाते में राशि जानी है वह खाता नंबर और पासबुक उपलब्ध कराया गया है। यही नहीं जिला पदाधिकारी औरंगाबाद के समीक्षात्मक बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के द्वारा गलत डाटा उपलब्ध कराया गया। यह नहीं बताया गया की इस योजना के संचालन के लिए प्रधानाध्यापकों को राशि नहीं दी गई है। फिर भी जिले विभिन्न प्रखंडों के बीआरपी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, पीएम पोषण योजना और जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा दबाव बनाकर जबरद्स्ती प्रधानाध्यापकों को अपने वेतन के पैसे से इस योजना के संचालन करने के लिए विवश किया जा रहा है। जो कि गलत है।

इनके द्वारा यह कहा जा रहा है कि उधार सामग्री वेंडर के द्वारा दिया जाना है। परंतु अधिकतर वेंडरों का कहना है कि मैं उधार सामग्री उपलब्ध कराने में असमर्थ हूं। आप सभी बीआरपी और पदाधिकारियों से कहना है कि प्रधानाध्यापकों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं अन्यथा संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगी। हमारी संगठन जल्द ही जिला अंतर्गत विद्यालयों द्वारा बनाए गए वेंडर की सूची विवरण सहित आरटीआई से मांग करेगी। जिले के सभी संबंधित पदाधिकारियों से अनुरोध है कि पीएम पोषण योजना के संचालन के लिए प्रधानाध्यापकों को दबाव न देकर, इस के संबंध में राज्य को सूचना दे दी जाए ।

 

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