औरंगाबाद

रेडियो एवं पंखा मकैनिक के बेटे ने बिहार बोर्ड की परीक्षा में पाया राज्य में सातवां स्थान आईआईटियन बन करना चाहता है देश की सेवा

औरंगाबाद। किसी शायर का ये शेर कि ” कहो नाखुदा से कि वो लंगर हटा लें, में तूफां की जिद देखना चाहता हूँ” को सही मायने में चरितार्थ किया है शहर के तेलिया पोखर निवासी रेडियो एवं पंखा मैकेनिक राजेन्द्र साव के पुत्र शम्भू कुमार ने।शम्भू ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा में सारे मिथकों को परास्त कर 500 में 481 अंक प्राप्त कर राज्य में सातवां स्थान प्राप्त किया है।

 

शम्भू ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता के साथ साथ ब्राइट कैरियर कोचिंग के संचालक गुप्ता सर और शिक्षक गजेन्द्र सर को दिया है जिनके कुशल निर्देशन और मार्गदर्शन से उसने इस मुकाम को हासिल किया है।शहर के गेट स्कूल के छात्र गजेंद्र की इस सफलता से न सिर्फ उसके माता पिता एवं गुरुजन खुश हैं बल्कि उसने जिलेवासियों को गर्व करने का अवसर प्रदान किया है।

शम्भू के पिता एक साधारण मैकेनिक है जो कर्मा रोड में रेडियो और पंखा बनाने की दुकान चलाते हैं जबकि उसकी  मां एक गृहणी हैं।शम्भू ने बचपन से ही अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है और सफलता में कभी मुफलिसी को आड़े नही आने दिया।उसके जीवन मे पढ़ाई को लेकर जितनी भी कठिनाईयां आई वह उतना ही मजबूत होता गया और यही कारण है कि आज उसने अपनी सफलता का परचम लहराते हुए अभावग्रस्त जीवन का सामना करने वाले बच्चों के लिए एक मिशाल बन गया।

शम्भू के पिता ने बताया कि वह शुरू से ही मेहनती छात्र रहा है। कोरोना काल में जब सारे स्कूल एवं कॉलेज बंद हो गए तो पढ़ने के लिए मोबाईल की आवश्यकता पड़ी। लेकिन उसके लगन और पढ़ाई के प्रति जुनून को देखते हुए उसके लिए जैसे तैसे कर एक मोबाइल की व्यवस्था की गई।शम्भू मोबाइल की मदद और शिक्षकों के मार्गदर्शन से खुद के बनाए हुए नोटस से पढ़ा और आज सफलता हासिल किया।

 

अपनी सफलता के बाद शम्भू ने आगामी बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने वाले परिक्षर्थियों को सफलता का टिप्स देते हुए कहा कि शिक्षकों के बताए रास्तों पर चले और सेल्फ स्टडी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सभी टॉपिक्स को पूरी तन्मयता से पढ़े। साथ ही साथ यह कोशिश रहे कि कोई भी जानकारी अधूरी न रहे। ताकि वह भार न बन जाए। शम्भू आईआईटीयन बनने की चाहत रखता है और आईआईटीयन बन कर अपने जैसे प्रतिभा सम्पन्न छात्रों की मदद करना चाहता है।

 

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