औरंगाबाद

फसल अवशेषों को खेतों में जलाने पर होगी कार्रवाई-डीएम

औरंगाबाद।समाहरणालय के सभाकक्ष में जिला पदाधिकारी सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में फसल अवशेष प्रबंधन हेतु जिले के कंबाइन हार्वेस्टर के संचालक एवं पदाधिकारी के साथ मंगलवार को एक बैठक आयोजित की गई।बैठक में जिलाधिकारी द्वारा सख्त निर्देश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में फसल अवशेष किसानों के द्वारा जलना नहीं चाहिए।फसल अवशेषों के जलने की सूचना जैसे ही प्राप्त होगी, तुरंत ही कृषको से पूछताछ के उपरांत दोषी व्यक्ति/हार्वेस्टर को जप्त कर संचालक के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

 

जिलाधिकारी द्वारा फसल अवशेष के जलने के दुष्प्रभाव की जानकारी दी गई।उन्होंने बताया कि फसल अवशेष को खेतों में जलाने से सांस लेने में तकलीफ,आंखों में जलन, नाक एवं गले की समस्या उत्पन्न होती है। इसके अलावे मिट्टी का तापमान बढ़ता है। जिससे मिट्टी में उपलब्ध जैविक कार्बन जो पहले से ही हमारी मिट्टी में कम है और भी जलकर नष्ट हो जाते हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि ऐसा करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी आती है एवं मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु मित्र कीट, केंचुआ आदि मर जाते हैं।

बैठक में उपस्थित जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि अभी तक द्व 40 हार्वेस्टर संचालकों को पास निर्गत किया गया है एवं उन्हें निर्देश दिया गया है कि बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के फसल की कटनी नहीं की जाए।उन्होंने कहा कि जिन संचालकों के पास स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम नहीं है वह 100 दिनों के अंदर उसका क्रय करना सुनिश्चित करें। कृषि विज्ञान केंद्र शिरीष औरंगाबाद के वैज्ञानिक के द्वारा बताया गया कि उनके केंद्र के द्वारा 426 कृषकों को वेस्ट डी कंपोजर उपलब्ध कराई गई है। जिसको फसल अवशेष पर घोल बनाकर छिड़काव करने से एक अच्छा जैविक खाद प्राप्त होता है। जिससे अगले फसल के लिए नाइट्रोजन कम देने की आवश्यकता पड़ती है।

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