औरंगाबाद

22 अप्रैल को मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस,1.71 लाख बच्चों को अल्बेंडाजोल पिलाने का है लक्ष्य

आइसीडीएस, शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग तैयार,शिक्षक व आंगनबाड़ी सेविका अपनी मौजूदगी में बच्चों को खिलाएंगी दवा

कृमि मुक्ति के लिए जिला में अभियान, 26 अप्रैल को मॉपअप राउंड

औरंगाबाद। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को लेकर जिला में छह माह से लेकर छह वर्ष तक के 1 लाख 71 हजार 506 बच्चों को अल्बेंडाजोल दवा खिलाने के लिए लक्षित किया गया है। अल्बेंडाजोल दवा का सेवन शिक्षक तथा आंगनबाड़ी सेविकाएं अपनी मौजूदगी में करायेंगी। इसके लिए शिक्षा तथा समेकित ​बाल विकास परियोजना विभाग सहित अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। दवा सेवन से छूटे हुए बच्चों को माप राउंड के तहत 26 अप्रैल को अल्बेंडाजोल दवा सेवन कराया जायेगा।

दवा खिलाने के दिया जा रहा है प्रशिक्षण

जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस.अनीषा भारती ने बताया कि बच्चों में कुपोषण दर में कमी लाने हेतु प्रत्येक छः माह पर सभी बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा दी जाती है। 22 अप्रैल को जिला अंतर्गत सभी आंगनवाड़ी केंद्र पर स्वास्थ विभाग के द्वारा अलमेंडाजोल दवा का सेवन कराया जाना है। सभी परियोजना में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के नेतृत्व में महिला प्रवेक्षिकाओ के द्वारा सभी आंगनवाड़ी सेविका को बच्चों को दवा खिलाने एवं प्रचार प्रसार करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।

1.71 लाख बच्चों को अल्बेंडाजोल पिलाने का है लक्ष्य

बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम को लेकर छह माह छह वर्ष के 1.71 लाख बच्चों को अल्बेंडाजोल सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित है। शिक्षकों व आंगनबाड़ी सेविकाओं की मौजूदगी में दवा सेवन कराना है। शुक्रवार को जिले के सभी सरकारी व गैर-सरकारी स्कूलों समेत आंगनबाड़ी केंद्रों पर दवा खिलायी जायेगी।

निर्धारित डोज के अनुसार खिलाई जाएगी दवा 

बच्चों को निर्धारित डोज के अनुसार दवाई खिलाई जानी है। इसमें 1 से 2 वर्ष के बच्चों के अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट को आधा कर उसका चूर्ण पानी के साथ खिलाना है। 2 से 3 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूर्ण कर पानी के साथ खिलाना है। इसके साथ ही 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाना है। इसके बाद ही पानी का सेवन करना है।

कृमि से मानसिक शारीरिक विकास होता है प्रभावित

डीपीओ ने बताया बच्चों, किशोर एवं किशोरियों में कृमि के कारण मानसिक और शारीरिक विकास बाधित होता है। ​स्कूलों में अनुपस्थिति बढ़ती और इससे उनका पढ़ाई का नुकसान होता है। आर्थिक उत्पादकता में कमी आती है। बच्चा, कुपोषण और एनीमिया का शिकार हो जाता है। बताया कि कृमि मुक्ति के लिए दवा सेवन कराने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्वास्थ्य और पोषण में सुधार होता है। एनीमिया को नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों के सीखने की क्षमता, कक्षा में उपस्थिति में सुधार होता, व्यस्क होने पर काम करने की क्षमता और आय में बढ़ोतरी आदि जैसे फायदे होते हैं।

कृमि संक्रमण से बचाव के तरीके

नाखून साफ और छोटे रखें, हमेशा साफ पानी पीयें, खाने को ढक कर रखें, साफ पानी से फल व सब्जियां धोयें,अपने हाथ साबुन से धोएं(विशेषकर खाने से पहले ओर शौच के बाद),
आसपास सफाई रखें, जूते पहनें, खुले में शौच ना करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करें।

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