औरंगाबादविचार

सत्ता पाने के चक्कर में मुफ्त राशन, मुफ्त बिजली, की घोषणाएं आने वाले भविष्य के लिए घातक

राजेश मिश्रा, स्वतंत्र पत्रकार

औरंगाबाद। सत्ता के सुख पाने के खातिर आए दिन राजनीतिक पार्टियां बड़े बड़े लोक लुभावने वादे करके सत्ता तो हासिल कर लेते हैं। लेकिन उनको आने वाले भविष्य की जरा सी भी चिंता नहीं है। आप सभी को विदित हो कि अभी श्रीलंका का क्या हाल है। सब को भलीभांति मालूम है। चारों ओर महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अभी भी हमारे पास समय है। आपसी तालमेल बनाकर ही इसका निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

 

लेकिन हमारे देश की विडंबना की बात है कि तमाम तरह के राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ ही नजर आते हैं। मुफ्त का राशन देना मुफ्त का बिजली देना अब राजनीतिक पार्टियां अपने चुनावी घोषणाओं में हथियार ही बना चुके हैं। नतीजतन अर्थव्यवस्था को भारी रूप से नुकसान हो रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि मुफ्त के राशन तो जिनके पास 10 एकड़ जमीन है वह भी उठा रहे हैं।

 

हमें और हम सबको मिलकर अपनी अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के बारे में सोचना चाहिए। अर्थव्यवस्था जो मुफ्तखोरी के कारण पटरी से खिसक रही है उसको पटरी पर लाने की जरूरत है। मतदाताओं को तो राजनीति पाटिया दुधारू गाय की तरह प्रयोग करती है। चुनाव आते ही ठीक पहले दनादन लंबे लंबे घोषणाएं कर देती है। उन्हें सिर्फ जादुई आंकड़े से मतलब है। हमारा देश किस ओर जा रहा है उससे कोई मतलब नहीं।

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