औरंगाबाद

विश्व परिवार दिवस पर विशेष-मिलिए औरंगाबाद के एक ऐसे परिवार से जो पिछले तीन पुश्त से एक ही थाली में खाते हैं खाना

औरंगाबाद।आज भागदौड़ की जिंदगी में जहां किसी के पास किसी को देने के लिए वक्त नहीं है.वैसी स्थिति में रिस्तों की अहमियत भी समाप्त होने लगती है.हम खुद को हम दो हमारे दो को ही लेकर चलना ही अपनी पारिवारिक जिम्मेवारियों को निर्वहन करना समझ लेते हैं.लेकिन कुछ लोग दरक रहे रिश्तों के बीच भी अपनापन की मिठास न सिर्फ घोलने मे सफल होते है बल्कि समाज मे एक आदर्श भी प्रस्तुत करते हैं.

 

विश्व परिवार दिवस पर Emaatimes एक ऐसे परिवार की तलाश कर रही थी जो पारिवारिक प्रेम, एक दूसरे के प्रति समर्पण और आत्मीयता का न सिर्फ भाव जागृत करे बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करें. हमारी खोज पूरी हुई और इस दौरान कई परिवार की जानकारी मिली. सभी ने अपने रिश्तों की डोर को काफी सम्भाल कर रखा है.लेकिन जब क्लब रोड स्थित पुलिस विभाग से सेवानिवृत हुए कृष्ण गोपाल जी के घर पहुंचा तो सही मायने में यह परिवार सबसे यूनिक लगा जो अन्य परिवार से अलग था.

 

कृष्ण गोपाल जी दो भाई है. इनके दूसरे भाई हैं राज गोपाल जी जो जीनियस कोचिंग के संचालक है और पिछले दो दशक से जिले मे शैक्षणिक माहौल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे है.यह परिवार पिछले तीन पुस्त से एक दूसरे के सुख दुख मे इतना घुल चुके हैं कि किसी एक का सुख हो तो वह पूरे परिवार का सुख हो जाता है और दुख भी है तो वह भी किसी एक का नही रहता. यह समर्पण कोरोना काल मे दिखा भी.

 

बातचीत के क्रम मे राज गोपाल जी ने बताया कि पिछले तीन पुश्तों से उनके यहां यह परंपरा चली आ रही है कि कभी भी वे अलग खाना नहीं खाए.आज भी वे घर पर हैं तो एक साथ और एक थाली में ही खाते हैं.एक थाली में खाने का कार्य दादा के समय से ही चला आ रहा है जब पिताजी दादाजी एवं अपने भाईयों के साथ खाना खाया करते. इतना ही नहीं उनके थाली मे हमलोग भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा जाते थे और सभी बड़े प्रेम से खाने का आनंद उठाते थे.आज भी वह अपने बड़े भाई और बच्चों के साथ एक थाली में ही खाते हैं.

 

उन्होंने बताया कि यह सिर्फ भाइयों मे ही नहीं बल्कि दोनों की पत्नियां भी बहन की तरह एक ही थाली मे खाती है और बच्चों ने भी इसे बरकरार रखा है. घर के छोटे बड़े मामलों मे किसी एक का निर्णय नहीं उसमें सबकी सहमति अनिवार्य होती है. राजगोपाल जी के घर का पारिवारिक सामंजस्य न सिर्फ संयुक्त परिवार की परिभाषा को परिभाषित करता है बल्कि  परिवार को एक साथ बांधकर,एक साथ लेकर कैसे चला जाए यह उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है.

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