औरंगाबाद

टेम्पू/थ्री व्हीलर/ऑटो से यात्रा के कु-परिणाम, सिर में 30-35 टांके

राकेश कुमार(लेखक- लोकराज के लोकनायक)

औरंगाबाद। बिहार के सभी यात्रा मार्गों में (30-40 किमी की छोटी दूरी हेतु) सहायक परिवहन सेवा के रूप में ऑटो की सेवा उपलब्ध है. जहाँ तक मैंने देखा है; बहुतायत संख्या में उपलब्ध है ,किंतु यात्रियों को मजबूर करके ये ऑटो वाले ठूंस-ठूंस कर इन्हें ऑटो में भरते हैं और जान को जोखिम में डाल देते हैं.

ऑटो से यात्रा के दौरान निम्नांकित सावधानियाँ बरतें ताकि आपकी यात्रा सुरक्षित हो सके.

1. सीट से ज्यादा न बैठें.

2. ड्राइवर अपने साथ आड़ा-तिरछा/तिरछा-तिरछी होकर चार यात्रियों को बैठा लेता है जो ड्राइविंग रिस्क व आपकी जान की जोखिम को बढ़ा देता है. आप आगे बैठने से बिल्कुल मना कर दें.

3. ऑटो चालक जब काफी तेज गति से और जिग-जैग(साँपनुमा) चालन करने लगे तो उसे तुरंत टोका-टोकी कीजिए. यदि इसके बावजूद भी नहीं माने तो रुकवा कर उतर जाइए क्योंकि आपकी जान कीमती है.

4. ऑटो पर बैठने के दौरान झपकी या सोने से बचिये अन्यथा कब ये अनाड़ी ऑटो वाले तेज गति से ठोकर कूदा कर आपको दुर्घटनाग्रस्त कर देंगे;आपको पता भी नहीं चलेगा.

कहाँ है सरकारी तंत्र??

सरकार ने सुरक्षित व विनियमित यात्रा के लिए तंत्र का विकास किया है जिसमें जिला परिवहन अधिकारी, सहायक जिला परिवहन अधिकारियों का तंत्र है जिसको शक्ति व साहस पुलिस का एक विंग ‘ट्रैफिक पुलिस'(T.P) प्रदान करती है. लेकिन सरकारी तंत्र यात्रा-परिवहन नियमों के मुताबिक यातायात विनियमन से ज्यादा वसूली में लगी रहती है, जैसा लोग बताते हैं. मेरे तो एक मित्र मुझे कई बार कह चुके हैं कि ट्रैफिक पुलिस का नाम बदल कर “तसीली पुलिस” किया जाना चाहिए. इसके लिए सरकार को लिखिए.

 

दो घटना का जिक्र यहाँ आवश्यक है.

1.पहली घटना

कल मेरी बहन जी और भांजा अपने गाँव बराही(गोह) से पंचरुखिया वाया फेसर मार्ग से औरंगाबाद आ रही थीं,उस दौरान औरंगाबाद के निकट बेला गाँव में सड़क पर दो बिजली का पोल रखकर बनाये गये ठोकर को रॉकेट की गति से चल रहे ऑटो द्वारा कूदाकर पार किये जाने से उनका सिर फट गया और 30 से 35 टांके लगे. यहाँ दो बातें हैं.

 

एक तो ऑटो चालक द्वारा गैर जिम्मेवाराना ढ़ंग से ऑटो का चालन तथा दूसरा, ग्रामीणों द्वारा संभवत: अपने ताकत के प्रदर्शन हेतु ऊँचे ठोकर का निर्माण किया जाना जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने गलत मानते हुए तकरीबन एक दशक पहले तोड़ने का आदेश दिया था.

2. दूसरी घटना

कल मैं पटना में ऑटो से यात्रा कर रहा था. मैं ऑटो में दो अन्य सहयात्रियों के साथ पीछे बैठा था. थोड़ी दूरी बाद एक लड़की ने बैठने के लिए रुकने का इशारा किया. ऑटोचालक ने महिला को बैठाने का हवाले देते हुए मुझे आगे अपने बगल में बैठने को कहा. मैंने मना किया. उसने सहानुभूति का कार्ड खेला. मेरे बगल के पुरुष यात्री आगे चले गये और ड्राइवर के साथ मिलकर मुझे कोसने लगे.

मैंने कड़ा प्रतिकार किया. मैंने कहा कि पटना की सड़कों पर न तो केवल एक ही तुम्हारा ऑटो है और न तो पूरे पटना में एक ही महिला है.

सुरक्षित यात्रा करें

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