औरंगाबाद

शून्य निवेश नवाचार द्वारा सरकारी विद्यालय के शिक्षक कर रहें हैं अभिनव शिक्षण तकनीक का प्रयोग

औरंगाबाद। सदर प्रखंड औरंगाबाद के उर्दू मध्य विद्यालय बहुआरा के शिक्षकों द्वारा शून्य निवेश नवाचार के माध्यम से बच्चों को उनकी अधिगम प्रतिफल प्राप्ति हेतु कई गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। वरीय शिक्षक राजकुमार प्रसाद गुप्ता द्वारा बिना खर्च के बनाए गए टीएलएम के माध्यम से बच्चों को सिखाया जा रहा है। इससे बच्चे दिलचस्पी ले कर कक्षा में सिख रहे हैं। शिक्षक राजकुमार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि छात्र केंद्रित शिक्षण प्रणाली को सफल बनाने के लिए शैक्षिक गतिविधियों में छात्र छात्राओं की सहभागिता आवश्यक होती है, इसलिए अब पुस्तकबद्ध शिक्षा से आगे बढ़कर विद्यालयों में आनुभविक शिक्षण प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है।

 

समय एवं परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षक अब नई नई विधियों का समावेश छात्रों के साथ उनके दैनिक जीवन में घटने वाली गतिविधियों के साथ कर रहे हैं, जिससे छात्रों के लिए शिक्षा रोचक, प्रासंगिक और ज्ञानवर्धक बन सके। इसके प्रभाव से विद्यालय में छात्रों के कक्षा के अनुरूप अधिगम स्तर में सुधार होता है तथा बच्चों के लिए स्वयं सिखने का माहौल भी आसानी से तैयार हो जाता है। विभिन्न विषयों को अलग अलग माध्यमों से रुचिकर और सरल बनाने की सोच और नीति अभिनव शिक्षण तकनीक नवाचार की नींव होती है।

 

इस तकनीक का फायदा यह है की इससे विद्यालय में आनुभविक, प्रासंगिक तथा रुचिकर शिक्षा का विकास होता है, पठन पाठन प्रक्रिया में छात्रों और शिक्षकों में सहभागिता होती है, छात्रों की स्मरण शक्ति और आत्म विश्वास में सुधार होता है, शिक्षकों के प्रोत्साहन स्तर में वृद्धि , छात्रों की नामांकन एवं उपस्थिति की दर तथा उनके ठहराव में सुधार होता है। अभिनव शिक्षण तकनीक में शून्य निवेश नवाचार एक अहम भूमिका निभाती है। शिक्षक बिना खर्च या कम लागत के टीएलएम निर्माण कर नवाचार के माध्यम से एक ही पाठ को पढ़ाने की अनेक सरल और रोचक गतिविधियां करा रहे हैं।

 

इससे शिक्षा में गुणात्मक सुधार संभव हो रहे हैं। वर्तमान समय में बिहार शिक्षा परियोजना पटना द्वारा बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान से जुड़ी दक्षताओं को प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन दक्षताओं में सामाजिक – भावनात्मक कौशल , साक्षरता, संख्या ज्ञान और यहां तक कि बाल कल्याण भी शामिल है। निपुण भारत का बिहारी रूप निपुण बिहार के तहत पढ़े बिहार बढ़े बिहार कार्यक्रम अंतर्गत माइक्रो इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट का दीक्षा पोर्टल ऐप द्वारा ऑनलाइन प्रोजेक्ट विद्यालय के प्रधानाध्यापकों द्वारा पूरा किया जा रहा है।

 

जिसके अंतर्गत विद्यालय के बच्चों के लिए कई प्रकार की गतिविधिया शिक्षकों की सहायता से आयोजित की जा रही है। इसके द्वारा शिक्षक, छात्र, बाल संसद के सदस्य, मीना मंच के सदस्य, विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्य, अभिभावकों तथा पदाधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हेतु विकासात्मक लक्ष्य के अंतर्गत बच्चे स्वास्थ्य एवं कल्याण बनाए रखने में सक्षम होना, बच्चे का प्रभावी संप्रेषक बनना तथा त्वरित रूप से आसपास के वातावरण से जुड़ते हैं। इससे बच्चे विद्यालयी शिक्षा के बाद के चरणों में ‘सीखने के लिए पढ़ना ‘ के प्रति आत्म विश्वासी बनते हैं। शिक्षक एक सुगमकर्ता के रूप में रहकर बच्चों को उनके सीखने की गति में सहायता करते हैं ताकि पूरे विश्वास के साथ अपनी अधिगम प्रक्रिया को बढ़ा सके।

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