औरंगाबाद

मातृ मृत्यु को कम करने के लिए मैटरनल डेथ एवं सर्विलेंस रिस्पांस विषय पर कार्यशाला का आयोजन

औरंगाबाद। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2016-18 के अनुसार एक लाख संस्थागत प्रसव में 149 महिलाओं की मौत हो जाती है. मातृ मृत्यु यानी मैटरनल डेथ को कम करने के लिए सरकार द्वारा एक रणनीति तैयार की गई है, जिसे मैटरनल डेथ एंड सर्विलेंस रिस्पांस (एमडीएसआर) नाम दिया गया है. एमडी एसआर विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन जिला स्वास्थ समिति के सौजन्य से किया गया शहर के एक निजी होटल में किया गया.

 

साथ ही कोविड-19 टीकाकरण महाभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मियों को जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं सिविल सर्जन द्वारा अंग वस्त्र एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. इस क्रम में गोह, दाउदनगर एवं नबीनगर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक एवं ब्लॉक मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक को सम्मानित किया गया. कोविड- 19 टीकाकरण कार्यक्रम के प्रमोशन हेतु जिले में ‘टीका लो इनाम जीतो’ कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है जिससे संबंधित पुरस्कार विजेताओं को भी इस दौरान सम्मानित किया गया. सदर अस्पताल औरंगाबाद में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र के सफल क्रियान्वयन हेतु उल्लेखनीय सहयोग के लिए डीपीएम डॉ. कुमार मनोज को भी सम्मानित किया गया.

 

कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी सौरव जोरवाल पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र एवं सिविल सर्जन डॉ कुमार वीरेंद्र प्रसाद द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया. इस कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक एवं डाटा ऑपरेटर सह प्रखंड मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक के साथ-साथ शहर के निजी अस्पतालों के चिकित्सक भाग लिए.राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार, पटना से नामित पाथ संस्था के चंदन कुमार द्वारा मातृ मृत्यु एवं नीपी संस्था के डॉक्टर व्योमकेश मिश्र द्वारा शिशु मृत्यु से संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई.

 

विदित हो कि एमडीएसआर मातृ स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक रणनीति है जिसका उद्देश्य मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है। एमडीएसआर सभी रोकने योग्य मातृ मृत्यु में कमी लाने के लिए लक्षित प्रतिक्रियाओं को सक्षम बनाता है. इसके अंतर्गत किसी भी मातृ मृत्यु होने के उपरांत सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान को खबर किया जाता है. खबर मिलने के उपरांत स्वास्थ्य संस्थान द्वारा संबंधित मातृ मृत्यु के कारणों का आकलन किया जाता है उसके पश्चात सुधार हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाती है.

 

इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. किशोर कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ कुमार मनोज, जिला लेखा प्रबंधक अश्विनी कुमार, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट उपेंद्र कुमार चौबे, डीपीसी नागेंद्र कुमार केसरी, टीम लीडर डीआरयू उर्वशी प्रजापति, डिस्टिक ऑफिसर फैसिलिटी अलका भारती एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे.

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