औरंगाबाद

जन्म मरण के बंधनों से मुक्त कराती है गीता

औरंगाबाद। कर्मा रोड के भास्कर नगर स्थित चित्रा समाज कल्याण केंद्र के प्रांगण में गीता जयंती के अवसर पर चित्रा दर्पण के 13वें अंक का लोकार्पण किया गया। साथ ही एक संगोष्ठी आयोजित कर “वर्तमान जीवन में गीता की प्रासंगिकता” विषय पर विभिन्न विद्वानों द्वारा विचार व्यक्त किए गए। सर्वप्रथम उपस्थित विद्वानों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ-साथ भगवान सूर्यनारायण की विधिवत् पूजा-अर्चना की गई। वक्तव्य की शुरुआत करते हुए हिंदी तथा संस्कृत पर समान अधिकार रखने वाले विद्वान डॉक्टर मधुसूदन पांडेय ने कहा कि मनुष्य का वर्तमान जीवन जितनी सुविधाओं से परिपूर्ण है उतनी ही बेचैनी, दुख- संताप और नाना प्रकार के झंझटों से भरा हुआ है।

 

 

इस दुखमय जीवन से छुटकारा पाकर संसार-सागर से पार उतरने का सबसे प्रमुख साधन गीता ही है। समकालीन जवाबदेही के संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि यदि हम गीता में भगवान श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक चेतना से रू-ब-रू हों तो पाते हैं कि इसमें बहुतेरे मार्ग ऐसे हैं जो मानव को सुगति प्रदान करने में निश्चित रूप से सहायक सिद्ध होते हैं। भगवान के श्रीमुख से निकले ज्ञान योग, भक्ति योग और कर्म योग ऐसे मार्ग हैं जिनके अनुसरण कर मनुष्य आसानी पूर्वक मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। संचालन के क्रम में धनंजय जयपुरी ने कहा की दुनिया में सिर्फ गीता ही एक ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। यह साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से नि:सृत अमृत घट है जिसका पान कर मनुष्य जन्म-मरण के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाता है।

 

 

यह जीवन जीने की कला सिखाती है। इसकी तुलना विश्व के कोई अन्य ग्रंथ नहीं कर सकते। गोवर्धन पाठक के अनुसार जीवन का कोई एक क्षण भी ऐसा नहीं है, जब मनुष्य बिना कर्म किए रह सके। यह केवल मानव जीवन का ही प्रश्न नहीं, बल्कि आत्मा का स्वभाव है कि वह निरंतर सक्रिय रहता है जो एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। अध्यक्षीय उद्बोधन में राम लखन मिश्र ने कहा की गीता के आदर्शों पर चलकर मनुष्य न केवल खुद का कल्याण कर सकता है बल्कि वह समस्त मानव जीवन का कल्याण कर सकता है। गीता में कहा गया है कि स्वयं का आकलन, क्रोध एवं मन पर नियंत्रण तथा फल की इच्छा का त्याग कर मनुष्य अलभ्य वस्तुओं की प्राप्ति भी सहज ही कर सकता है।

 

कार्यक्रम के अंत में उक्त संस्था के सचिव राम नरेश मिश्र ने आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर उपरोक्त लोगों के अलावा मोहन पाठक, शैलेंद्र मिश्र शैल, अरुण मिश्र, सुदर्शन पांडेय, प्रत्यूष कुमार, अवध किशोर मिश्र, दिनेश मिश्र ललिन कुमार, सुरेश पाठक, जवाहर पाठक, पुरुषोत्तम पाठक, मुरलीधर पांडेय, मिथिलेश मिश्र, महाराज मिश्र, उज्ज्वल रंजन इत्यादि उपस्थित थे।

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