औरंगाबाद

सांसद सुशील कुमार सिंह ने लोकसभा में की मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ने की मांग

औरंगाबाद। औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने नियम 377 के तहत लोकसभा में मगध की भाषा मगरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है अपने संबोधन में सदन को सांसद ने बताया कि मगही भाषा को मगधी भाषा के नाम से जाना जाता है जो मगही का पूर्वज भाषा है और बाद में उत्पन्न हो कर मगही के नाम से प्रचलित हुआ। मगधी भाषा भारत और नेपाल के भाग में बोला जाता है। इस भाषा को बोलने वाले वक्ताओं की संख्या लगभग 18 मिलियन है।यह भाषा बिहार के 8 जिलों में बोली जाती है।

 

 

वर्ष 1961 के जनगणना में मगधी को हिन्दी के अंतर्गत कानूनी रूप से अंगीकार किया गया था ग्रामरियन कच्छयानो ने मगधी भाषा के महत्व को उल्लेखित कराते हुए लिखा है कि “यह भाषा सभी भाषाओं का बुनियाद है।”ब्राह्मणों और अन्य लोग कल्प के शुरुआत में इस भाषा को बोलते थे और सर्वोच्य एवं पूज्य भगवान बुद्ध की मगही भाषा बोलते थे। वर्तमान मगही भाषा का विकास कब हुआ अज्ञात है परंतु भाषा विशेषज्ञों ने मगही भाषा का विकास 8 से 11वीं सेंचुरी माना है।

 

 

शिशुनाग वंश में मगध वंश को स्थापित किया।मगध वंश का भारत में शासन 684 BC से 320 BC तक का उल्लेख है जिसका वर्णन रामायण और महाभारत में भी है।मगध के गुप्त वंश और मौर्य वंश के द्वारा भारत के प्राचीन इतिहास को स्थापित करने के लिए विभिन्न भाषाओं का विकास किया।मगध साम्राज्य के अंतर्गत ही अधिकांश लोगों द्वारा मगही भाषा का प्रयोग किया जाता है।अतः सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह है कि देश एवं विदेश के विभिन्न भागों में बोली जाने वाली मगही भाषा को संविधान के 8वीं अनुसूची में जोड़ने की कृपा की जाए।

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