औरंगाबाद

पान के साथ साथ अन्य वैकल्पिक फसल की खेती करने वालों से डीएम ने की मुलाकात,सुनी उनकी समस्या

नाबार्ड की सहायता से स्ट्रॉबेरी,अमरूद और मगही पान की खेती के विकास के लिए बनाई जा रही योजना

औरंगाबाद। जिला पदाधिकारी द्वारा बुधवार को देव के पश्चिमी केताकी एवं बेढ़नी पंचायत में वैकल्पिक फसल की जानकारी प्राप्त करने हेतु किसानों से बातचीत की गई और जिला उद्यान कार्यालय की योजनाओं का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी भी साथ थे।

 

जिला उद्यान पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि औरंगाबाद में 12 जगहों पर किसानों के समूह द्वारा मगही पान की खेती को जा रही है जिसमे राज्य सरकार द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। मगही पान को जीआई यानी जियोग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन टैग भी मिला हुआ है। मगध क्षेत्र के चार जिले औरंगाबाद, नवादा, गया और नालंदा में मगही पान की खेती होती है। यह खेती अत्यंत मुश्किल मानी जाती है। सरकार द्वारा इस खेती में किसानों का समूह बनाकर सहायता देने का प्रावधान है।

 

विशेष बागवानी फसल योजना अंतर्गत किसानों को 35,250 रुपए प्रति किसान प्रति 300 वर्ग मीटर दिया गया है। सभी किसानों को मगही पान कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड के सभी सदस्य है। अभी तक कुल 79 किसानों को इसका लाभ दिया गया है और 200 किसानों को और इसका लाभ दिया जाने वाला है। पान की खेती करने वाले किसानों द्वारा बताया गया कि बाजार में उचित मूल्य न मिल पाने के कारण मगही पान के ज्यादातर किसान समस्या से घिरे हैं।

 

जिला पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि जीआई टैग प्राप्त उत्पाद जैसे मखाना, जर्दालू आम, कतरनी चावल, लीची के साथ मगही पान का भी सरकार का एक्सपोर्ट करने का प्लान है। पान उत्पादक किसानों को आने वाले समय में ज्यादा मुनाफा होगा। साथ ही नाबार्ड की सहायता से भी जिले की तीन फसलों के विकास की योजना बनाई जा रही है जिसमे स्ट्रॉबेरी, अमरूद और मगही पान का चयन किया जा रहा है।

 

जिला पदाधिकारी द्वारा किसानों के साथ खेत पर जाकर फसल की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली गई और उनकी समस्याओं के बारे में जाना गया। साथ ही आश्वासन दिया गया कि राज्य सरकार द्वारा यथासंभव किसानों की सहायता की जाएगी ताकि उन्हें अपने परिश्रम का उचित फल मिल सके।

 

जिला पदाधिकारी द्वारा कृषि विभाग द्वारा निर्मित पक्के चैक डैम का निरीक्षण किया गया। भूमि संरक्षण विभाग के पदाधिकारियों द्वारा बताया गया कि 7 लाख 51 हजार को लागत से 30 फीट का चैक डैम बनाया गया है जिससे एक किलोमीटर के क्षेत्र में सिंचाई में सुविधा हुई है। इस वर्ष भी ऐसे 9 चैक डैम और बनाए जायेंगे।

 

निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी द्वारा किसानों से रोपनी, बच्चों की शिक्षा, आवास, पेयजल की उपलब्धता, सड़क मार्ग की स्थिति इत्यादि के बारे में भी जानकारी प्राप्त की गई।

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